सीहोर। मध्यप्रदेश के मनरेगा उपयंत्री अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त से लगातार आंदोलनरत हैं। उपयंत्रियों का कहना है कि वे अब तक शांतिपूर्ण और शांतिप्रिय तरीके से शासन-प्रशासन से गुहार लगाते रहे, किंतु आज तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
मुख्य मांगों में वेतन विसंगति दूर करना, अनुकम्पा नियुक्ति, निलंबन प्रक्रिया में सुधार, ग्रेच्युटी का प्रावधान समय पर वेतन मिलना तथा सहायक यंत्री का प्रभार देना शामिल है। प्रदेश सरकार ने जुलाई 2023 में संविदा कर्मचारियों के लिए नीति लागू करने की घोषणा की थी, जिसे अधिकांश विभागों ने लागू भी कर दिया है। लेकिन ग्रामीण विकास विभाग अब तक इस नीति को लागू नहीं कर पाया है।
मनरेगा अभियंता संघ के प्रांत अध्यक्ष सतीश समेले द्वारा बताया गया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने विभाग को उनकी समस्याओं के समाधान हेतु स्पष्ट निर्देश दिए थे, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने उन निर्देशों को भी नजरअंदाज कर दिया, जिससे उपयंत्रियों में गहरी नाराजगी है।
आज प्रदेश के 55 जिलों में उपयंत्रियों ने सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपा, जो मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, एसीएस पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा जिला कलेक्टरों को संबोधित था। इस ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि 5 दिनों के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो सभी उपयंत्री अपने परिवारजनों और रिश्तेदारों सहित भोपाल स्थित विकास भवन का घेराव करेंगे।
इंजीनियर की 8 सूत्रीय मांगों गो के समर्थन मेंप्रदेशभर के 150 अधिक विधायक एवं 12 से अधिक मंत्रियों ने समर्थन में अनुशंसा की है तथा विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिल चुका है। वहीं, उपयंत्रियों की हड़ताल के चलते पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्य ठप हो गए हैं। मनरेगा योजनाओं का संचालन बाधित होने से ग्रामीण मजदूर पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं और गांवों में विकास कार्य पूरी तरह चरमरा गए हैं।
मनरेगा उपयंत्रियों ने साफ कहा है कि यदि सरकार और विभाग ने अब भी लापरवाही दिखाई, तो उनका आंदोलन पूरी तरह उग्र स्वरूप लेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी ।







