सीहोर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 44 डिग्री तपती गर्मी में बूंद बूंद पानी के लिए तरसती ग्रामीण जनता, भीषण जल संकट

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ग्रामीणों ने सरकार से लगाई गुहार प्यास गांव में तुरंत नलकूप खनन की मांग पानी का बजट कटौती के कारण नहीं हो पा रहे हैं बोर खनन
सीहोर( निप्र)। मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ती गर्मी और 44 डिग्री तापमान के बीच सीहोर जिले के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में भीषण जल संकट गहराता जा रहा है। गांवों में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग दिनभर एक-एक बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। कहीं ग्रामीण दूर-दराज खेतों के कुओं पर पानी की तलाश में पहुंच रहे हैं, तो कहीं झरियां खोदकर मटमैला पानी पीने को विवश हैं। सरपंच पति मोन बाइ के प्रतिनिधि अशोक मीणा ग्राम पंचायत रामगढ़ कहना है कि हमारे गांव में जल संकट के लिए महिलाएं कहीं गिरी खोज कर मत मिला पानी पीने को मजबूर है तो कहीं गहरे कुएं में उतर कर जान जोखिम में डालकर मत मिला पानी पीने को मजबूर है सरपंच प्रतिनिधि द्वारा फ के भाग जिला प्रशासन को कई बार आवेदन दे चुके हैं लेकिन अभी तक नलकूप खनन कर पानी की समस्या का हल नहीं किया गया है साथी रेशम भाई गौरी बाई कोसा बाई राजकुमार बाई राजकुमार बाई गायत्री बा इ का कहना है कि कई गांवों में जलस्तर पाताल तक पहुंच चुका है। महिलाएं गांव से एक से दो किलोमीटर दूर जाकर जान जोखिम में डालते हुए गहरे कुओं में उतरकर कपड़े से छानकर गंदा पानी ला रही हैं। भीषण गर्मी में पानी की यह समस्या ग्रामीण जीवन के लिए गंभीर संकट बन गई है। क्षेत्र के किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा द्वारा मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) मंत्री एवं सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री से जल संकट प्रभावित गांवों में नवीन नलकूप खनन कराने की मांग की जा चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष पीएचई विभाग को नवीन नलकूप खनन के लिए लगभग 30 बोर का लक्ष्य एवं बजट मिला है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत कम है। पिछले वर्ष करीब 100 नलकूपों का बजट प्राप्त हुआ था। बजट कम होने के कारण जल संकट वाले अधिकांश गांवों में नए बोर खनन संभव नहीं हो पा रहे हैं। ग्रामीण जनता ने मुख्यमंत्री एवं मध्य प्रदेश शासन के वित्त विभाग से मांग की है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का बजट बढ़ाया जाए तथा सीहोर जिले को कम से कम 100 से अधिक नलकूप खनन की स्वीकृति दी जाए, ताकि जल संकट से जूझ रहे गांवों को राहत मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि बड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि एयर कंडीशनर कार्यालयों में बैठकर ठंडा पानी पीते हैं, जबकि गांवों की जनता कड़ाके की धूप में बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रही है। कई स्थानों पर लोग गंदा और मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।

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