कलेक्टर जनसुनवाई में भी किसानों की पांच वर्ष से रूके हुए फसल बीमे की मांग
सीहोर। मंगलवार, 16 सितम्बर को ग्राम कुलांस खुर्द, ढाबला, बमूलिया, धबोटी, चन्देरी, भगवान पुरा के दर्जनों किसानों ने किसान व समाजसेवी एम.एस.मेवाड़ा के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान व प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम का ज्ञापन मुख्य डाक घर के ज्ञापन रजिस्ट्री कर पोस्ट किया गया एवं कलेक्टर सीहोर को जनसुनवाई अलग-अलग किसानों ने आवेदन दिया जिसमें बताया गया कि कुछ दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शाजापुर जिले के गाँव में किसानो के बीच में खऱाब सोयाबीन को देखा गया था, जिसमे इलेक्ट्रोनिक मीडिया के अनुसार मुख्यामंत्री जी द्वारा सीहोर जिले में 30 हजार 200 हेक्टेयर कृषि भूमि में सोयाबीन की फसल प्रथम आंकलन में नुकसान बताया गया है एवं दिनांक 13 सितम्बर 2025 को प्रकाशित समाचार पत्रों के अनुसार सोयाबीन का बोया गया रकबा 3 लाख 20 हजार के लगभग बताया गया है, जबकि इसके अनुसार माने तो 10 प्रतिशत हेक्टयर रकबा खऱाब सोयाबीन की फसल का नुकसान निकलता है जो कि पीला मोजिक व् अन्य बीमारी एवं प्राकृतिक आपदा कारणों से नुकसान हुआ है। किसानों द्वारा मांग की गई है कि शाजापुर में मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन किया जावे। समाचार पत्रों के अनुसार जिला प्रसाशन द्वारा सीहोर जिले में सोयाबीन की खऱाब फसलों का रकबा 3 प्रतिशत हेक्टेयर बताया गया अब स्थिति में क्या सही माने।
विगत 5 वर्षो से प्राकृतिक आपदा, अधिक बाढ़ , वर्षा, जल भराव, फसल में पिला मोजिक या अन्य कारणों से हमारी फसले खऱाब होती चली आ रही है, जिसकी हम किसान हर साल समय समय पर बीमा कंपनी व शासन-प्रशासन से खऱाब फसलों का बीमा राशि देने की मांग करते चले आ रहे है । परन्तु अभी तक हमारी खराब हुई फसल का बीमा नही दिया गया है।
केन्द्रीय बैंक एवं सहकारिता बैंक हम किसानों की बिना सूचना के हमारे बैंक खाते से बीमा राशि काट कर हर 6 माह में बीमा कम्पनी को भेज दी जाती है, परन्तु हम कृषकों को विगत 5 वर्षों से बीमा राशि नही दी गई है, जो कि हमारे साथ सरासर अन्याय है एवं इस बार भी हम किसानों को बीमा राशि नहीं मिली है ऐसी स्थिति में या तो 5 साल से जो खऱाब फसल हो रही है, बिना अनुमति के काटी गई बीमा राशि वापस की जाए और जब बीमा नही दिया जा रहा है तो हमारी बीमा राशि बैंक से काटना बंद कराया जाए।








