पैगाम ए सीरत का जलसा संपन्न

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सीहोर। नौजवानों को यह समझना होगा की उनका एक गलत क़दम न केवल उनके घर, परिवार बल्कि पूरे समाज पर गलत प्रभाव डालता है। हमें अपनी ज़िंदगी को हमारे नबी मोहम्मद साहब के मार्गदर्शन वाली ज़िंदगी बनाने की ज़रूरत है। इससे चारों और मोहब्बत, भाईचारा और अमन का बोलबाला होगा।
यह बातें विगत सोमवार 8 सितम्बर को सराएं स्थित जमा मस्जिद से पैगाम के रूप में सामने आईं। मौक़ा था पैगाम ए सीरत के जलसे का जो 15 रवि उल अव्वल पर आयोजित किया गया था। जलसे में सरपरस्त के रूप में जामियतुल उलेमा के सदर मुफ़्ती मोहम्मद शमसुद्दीन मौजूद थे। वहीं मेहमान ए खुसूसी के तोर पर अकावता बड़ली के मौलाना अशफ़ाक़ उर्रेहमान प्रमुख वक्ता के रूप में मौजूद थे।

– नौजवानों को सख्त पैगाम
वक्ताओं ने जलसे के दौरान उन नौजवानो को सख्त पैगाम दिया जो इस दौर में अपने दीन और पैग़म्बर मोहम्मद साहब के बताए रास्ते से भटक रहे हैं। वो नौजवान जो गैर मज़हब के बहन बेटियों के साथ दोस्ती करते हैं। उन भटके नौजवानों को ये बताया गया की कोई भी गलत क़दम उठाने से पहले यह सोचे की हमारे घर में भी बहन बेटियां हैं। साथ ही यह भी ध्यान दें की किसी की इज़्ज़त को उछालना अल्लाह के सामने कितना बड़ा गुनाह है।
– आपकी एक गलती क़ौम को बदनाम करती है
– वक्ताओं ने सख्त लहजा अपनाते हुए उन मोलाना और मुफ़्तीयों को ज़िम्मेदारी दी है जो मस्जिदों के इमाम हैं। मस्जिद के ज़िम्मेदारान को यह ज़िम्मेदारी दी गई है की अपने अपने हल्क़े में मेम्बरों से इस पैगाम को आम करें की हमारे नौजवान दूसरे मज़हम की बहन बेटियों के सामने शराफत से पेश आएं। समाज के बीच अपने आपको ऐसे पेश करें जैसा हमारे पैगम्बर मोहम्मद साहब ने हमे सिखाया है। यही सच्चा दीन और सच्चा ईमान है।

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