ई-नगर पालिका 2.0 सॉफ्टवेयर लॉन्च, नपाध्यक्ष प्रिंस राठौर ने कहा डिजिटल इंडिया को बढ़ावा मिलेगा

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सीहोर। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के द्वारा ई-नगर पालिका 2.0 सॉफ्टवेयर लॉन्च किया जा रहा है। शुक्रवार को नगर पालिका के कक्ष में नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, सीएमओ भूपेन्द्र दीक्षित, राजस्व सभापति अजयपाल राजपूत के समक्ष टीम के लीडर आकाश शुक्ला, अभिषेक रेकवार और राजस्व से जीवन सिंह दांगी आदि ने इस संबंध में एप्लीकेशन की बारीकियों से अवगत किया गया।
इस संबंध में जानकारी देते हुए ई-नगर पालिका के पार्टल मैनेजर जीवन सिंह दांगी ने बताया कि ई-नगर पालिका 1.0 के जरिए 22 नागरिक सेवाएं दी जा रही हैं। इसमें 15 मॉड्यूल शामिल हैं। ई-नगर पालिका को अलग-अलग विभागों जैसे उद्योग, राजस्व, पंजीयन विभाग और भारत सरकार के अहम मोबाइल एप्लीकेशन से भी जोड़ा गया है। नए पोर्टल में एक मॉड्यूल सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इनमें जीआईएस आदि सुविधा शामिल की गई है। उन्होंने बताया कि ई-नगर पालिका 1.0 जोकि वर्ष 2015-16 में चालू किया गया था। गत वर्ष 22 दिसंबर 2023 को पोर्टल हैक हो जाने के कारण पोर्टल एवं सर्वर ठीक से चल नहीं पा रहा था। मध्यप्रदेश नगरीय प्रशासन द्वारा नवीन पोर्टल उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए आरंभ दिया गया है जिसे शुल्क जमा करने के लिए तैयार किया गया है, नए पोर्टल में उपभोक्ताओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यूपीआई केस चेक द्वारा भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। नया पोर्टल आज दिनांक से लाइव हो गया है जिसके माध्यम से आम उपभोक्ता संपत्ति कर एवं जलकर पोर्टल के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं, उन्होंने बताया कि यह परियोजना डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने और नागरिकों को पारदर्शी तरीके से सेवाएं देने के मकसद से तैयार की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, ई-नगर पालिका सॉफ्टवेयर के जरिये सभी नागरिक सेवाओं, जन शिकायत सुविधा, निकायों की आंतरिक कार्य प्रणाली, हर तरह के भुगतान व बजट प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम में लाया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को एक पोर्टल पर लाया गया है। कॉमन सर्विस सेंटर, एम ऑनलाइन, कियोस्क सेंटर और भुगतान गेटवे के साथ ई-नगर पालिका 2.0 को जोड़ा जाएगा।
.अब नए पोर्टल को क्लाउड पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। इसके लिए करोड़ों रुपए से ई-नगरपालिका 2.0 का काम पूरा कर लिया है। इसमें तकनीक से किसी बिल्डिंग परमिशन के मामले में सैटेलाइट इमेज की मदद से ये भी पता लगाया जा सकेगा कि कोई भवन कितनी जमीन पर और कितने फ्लोर तक बना है। यही सॉफ्टवेयर डेटा का विश्लेषण करने में भी मदद करेगा कि किसी शहर के किस इलाके में वसूले गए टैक्स का पैटर्न क्या है। पोर्टल की लॉन्चिंग कुछ सुविधाओं के साथ की गई है फिर लोगों की सहूलियत के अनुसार समय-समय पर इसमें नई सुविधाएं जोड़ी जाती रहेंगी।

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