लो-प्रेशर सिस्टम से देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में बारिश होने के आसार: आईएमडी

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नई दिल्ली (आरएनएस)। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे ओडिशा तथा उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर निम्न दबाव का एक सक्रिय क्षेत्र बना हुआ है। इसके प्रभाव से आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। मौसम तंत्र के धीरे-धीरे पश्चिम की ओर बढऩे के कारण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को आमतौर पर बादल छाए रहने की संभावना है। दोपहर के समय कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इस दौरान बिजली चमकने और गरजने की भी संभावना है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।हरियाणा और पंजाब के कुछ इलाकों में भी कहीं-कहीं बारिश हो सकती है, हालांकि इन राज्यों में भारी बारिश की कोई बड़ी संभावना नहीं है। उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में फिलहाल बारिश की गतिविधियां सीमित रहने का अनुमान है।
निम्न दबाव का क्षेत्र जैसे-जैसे देश के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ेगा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बढऩे की उम्मीद है। इसके अलावा बिहार और झारखंड में भी आने वाले दिनों में लगातार बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। दोनों राज्यों के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मौसम तंत्र के पश्चिम दिशा में आगे बढऩे के साथ राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तथा कोंकण-गोवा क्षेत्र में भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। मानसून की विदाई से पहले राजस्थान और गुजरात के लिए यह बारिश का दौर विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में मौसम तंत्र के प्रभाव से कई स्थानों पर बारिश हो सकती है।
दक्षिण भारत में केरल और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश होने की संभावना है। दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में भी हल्की बारिश के साथ गरज-चमक और छींटे पड़ सकते हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की वापसी लगभग 20 सितंबर के आसपास शुरू होने की संभावना है। मानसून की वापसी के साथ देश में मानसून के बाद के मौसम की ओर बदलाव शुरू होगा। ऐसे में पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में मानसून की विदाई से पहले सक्रिय हुआ यह मौसम तंत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बीच मौसम के पूर्वानुमान में अल नीनो की स्थिति के मजबूत होने के भी संकेत मिल रहे हैं। इसके अक्टूबर से दिसंबर के बीच चरम पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का सामान्य तौर पर मानसूनी बारिश पर प्रभाव पड़ता है, लेकिन भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून का व्यवहार अलग हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अल नीनो की परिस्थितियां उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान भारत के कुछ हिस्सों के लिए अनुकूल भी साबित हो सकती हैं। आने वाले दिनों में सक्रिय मौसम तंत्र और मानसून की वापसी की स्थिति देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश की गतिविधियों को प्रभावित करेगी।

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