यमन के मिसाइल हमलों से दहला सऊदी अरब, दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको को बनाया निशाना

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मध्य पूर्व में जारी संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने का दावा किया है। हमलों के बाद सऊदी अरब के जिजान औद्योगिक क्षेत्र में कई विस्फोटों की आवाज सुनी गई, जबकि कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित होने की खबर है। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हमले में जिजान स्थित एक महत्वपूर्ण सऊदी औद्योगिक प्रतिष्ठान तथा अरामको से जुड़ी एक तेल सुविधा को निशाना बनाया गया। इसके अलावा जिजान, यानबू और दमाद क्षेत्रों में भी हमलों का असर देखने को मिला। स्थिति को देखते हुए सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने यानबू प्रांत के लिए राष्ट्रीय प्रारंभिक चेतावनी मंच के माध्यम से आपातकालीन चेतावनी जारी की।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। ऐसे माहौल में सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष ने क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है।
इससे पहले शुक्रवार देर रात सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले होदेइदा शहर में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इसके बाद हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी थी कि सऊदी कार्रवाई का करारा जवाब दिया जाएगा।
हूती विद्रोहियों से जुड़े अल-मसीरा टेलीविजन के अनुसार, सऊदी हमलों में होदेइदा स्थित दूरसंचार प्राधिकरण की सुविधाओं और कमरान द्वीप को निशाना बनाया गया। इन हमलों में एक महिला के घायल होने की भी सूचना दी गई थी।
इससे पहले हूती विद्रोहियों ने दावा किया था कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसमें कम से कम एक जहाज क्षतिग्रस्त हो गया। हूती संगठन ने इसे 20 जुलाई को घोषित समुद्री नाकेबंदी के तहत की गई कार्रवाई बताया और कहा कि यह सना हवाई अड्डे पर हुए हमले के जवाब में की गई है।
हालांकि इन दावों और घटनाओं को लेकर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं और सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों पर बढ़ते हमलों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक गलियारों में शामिल है और यहां अस्थिरता बढऩे से तेल परिवहन तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।
सऊदी अरब और यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष पिछले एक दशक से जारी है। यमन के गृहयुद्ध के दौरान सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया, जबकि हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त होने के आरोप लगते रहे हैं।
हाल के दिनों में लाल सागर में समुद्री नाकेबंदी की घोषणाओं, तेल टैंकरों पर हमलों और सीमा पार सैन्य कार्रवाइयों ने दोनों पक्षों के बीच 2022 से चली आ रही अनौपचारिक शांति को भी संकट में डाल दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।

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