भारत ने कहा- आधिकारिक मानचित्र के अनुसार दिखाया जाए पूरा भूभाग
इस्लामाबाद,07 सितंबर। संयुक्त राष्ट्र द्वारा दुनिया के नए मानचित्र के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित प्रस्ताव का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों सहित भारत के पूरे भूभाग को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए। भारत के इस रुख पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताते हुए इसे ‘बेबुनियाद’ करार दिया है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर भारत के दावे को निराधार बताया। पाकिस्तानी मंत्रालय ने कहा कि भारत का रुख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त तथ्यों के विपरीत है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत की एकतरफा कार्रवाइयां और कथित अवैध कब्जा जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विवादित स्थिति को नहीं बदल सकता। मंत्रालय ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में मौजूद सबसे पुराने अनसुलझे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विवादों में से एक है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव न तो किसी विशेष विश्व मानचित्र को अपनाता है और न ही उसे प्रमाणित करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों अथवा स्थानों के नामों से संबंधित राजनीतिक मानचित्रण के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं की गई है।
भारत ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों सहित भारत के पूरे भूभाग को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के मानचित्रों के इस्तेमाल को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया है। इसके तहत ऐसे विश्व मानचित्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जिनमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात के अधिक करीब दिखाई देता है।
इस पहल का उद्देश्य लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे मर्केटर विश्व मानचित्र से जुड़ी क्षेत्रफल संबंधी विकृतियों को कम करना है। मर्केटर मानचित्र में पृथ्वी की गोलाकार सतह को समतल रूप में दिखाने के कारण ध्रुवों के आसपास के क्षेत्रों का आकार वास्तविकता की तुलना में काफी बड़ा दिखाई देता है।
नए मानचित्र में अफ्रीका का आकार पहले की तुलना में अधिक बड़ा दिखाई देगा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका अपेक्षाकृत छोटे नजर आएंगे। इसका कारण यह है कि नए मानचित्र में देशों और महाद्वीपों के क्षेत्रफल को वास्तविक आकार के अधिक करीब दिखाने का प्रयास किया गया है।
हालांकि, मानचित्र में दिखाई देने वाले आकार में बदलाव का देशों या महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह केवल पृथ्वी की सतह को मानचित्र पर प्रदर्शित करने की पद्धति में बदलाव है।
संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव का मूल उद्देश्य मानचित्रों में क्षेत्रफल की विकृति को कम करना है, लेकिन इसके संदर्भ में भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी सामने आई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि नए विश्व मानचित्र से जुड़ा प्रस्ताव किसी विवादित क्षेत्र की राजनीतिक या क्षेत्रीय स्थिति निर्धारित नहीं करता।
वहीं, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत के दावे को खारिज करते हुए इसे विवादित क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय स्थिति के विपरीत बताया है। दोनों देशों के बीच जम्मू-कश्मीर का मुद्दा लंबे समय से कूटनीतिक विवाद का प्रमुख विषय रहा है।








