राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले लगभग एक महीने से जारी छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने वाले लोगों को बिना किसी उत्पीडऩ, गिरफ्तारी या हिंसा के अपना लोकतांत्रिक अधिकार प्रयोग करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने नियमित प्रेस वार्ता के दौरान पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में यह टिप्पणी की। उनसे भारत में चल रहे छात्र आंदोलन और उससे जुड़ी घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र का दृष्टिकोण पूछा गया था।
प्रश्न में कहा गया कि भारत में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है तथा आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। इस पर संयुक्त राष्ट्र का क्या रुख है?
इसके जवाब में स्टीफन डुजारिक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इस विरोध-प्रदर्शन से अवगत है। उन्होंने कहा कि जो भी लोग शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना चाहते हैं, उन्हें बिना किसी उत्पीडऩ, गिरफ्तारी या चोट पहुंचाए ऐसा करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करें। यह सिद्धांत केवल किसी एक देश के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के सभी देशों में समान रूप से लागू होता है।
संयुक्त राष्ट्र के इस बयान के बाद दिल्ली में जारी छात्र आंदोलन एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने आंदोलन की मांगों या उससे जुड़े राजनीतिक पहलुओं पर कोई टिप्पणी नहीं की, बल्कि केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और मानवाधिकारों की सुरक्षा पर अपना सामान्य रुख दोहराया।
गौरतलब है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र पिछले एक महीने से विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार तनाव की स्थिति भी सामने आई है, जिस पर अब संयुक्त राष्ट्र ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया है।








