ईरानी जलक्षेत्र में एलपीजी टैंकर पर हमला, सभी 28 भारतीय नाविक सुरक्षित, दूतावास ने की पुष्टि

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ईरानी जलक्षेत्र में मोजाम्बिक के ध्वज वाले तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) टैंकर ‘दिशा’ पर हुए हमले के बाद जहाज पर सवार सभी 28 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है और स्थिति पर निकटता से नजर रख रहा है।
भारतीय दूतावास ने अपने बयान में कहा कि एलपीजी टैंकर ‘दिशा’ (आईएमओ संख्या- 8818219) से जुड़ी घटना की जानकारी प्राप्त होते ही संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया। दूतावास ने पुष्टि की कि जहाज पर सवार सभी 28 भारतीय चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं।
दूतावास के अनुसार, उसके अधिकारी लगातार घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाए हुए हैं। हालांकि, बयान में हमले की प्रकृति अथवा जहाज को हुए संभावित नुकसान के संबंध में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित 21वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए समुद्री सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में नाविकों, नागरिक व्यापारिक जहाजों तथा महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना पर हमले स्वीकार्य नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का स्पष्ट मत है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सुरक्षित, निर्बाध और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप खुले रहने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिक जहाजों और समुद्री कर्मियों को किसी भी प्रकार के संघर्ष का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
खाड़ी क्षेत्र में लगातार व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों और बढ़ते सुरक्षा संकट को देखते हुए भारत के समुद्री प्रशासन महानिदेशालय ने पहले ही जहाज स्वामियों, जहाज प्रबंधन कंपनियों तथा भर्ती एवं नियुक्ति सेवा लाइसेंस प्राप्त संस्थाओं को परामर्श जारी किया है।
महानिदेशालय ने अगले आदेश तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती से बचने की सलाह दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
17 जुलाई को जारी परामर्श में खाड़ी क्षेत्र की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया था। इसमें कहा गया था कि भारतीय नाविकों तथा भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महानिदेशालय की प्रमुख जिम्मेदारी है।
परामर्श में मोम्बासा बी, अल बह्याह, जीएफएस गैलेक्सी, एमटी वेडयान और अल रेकयात जैसे व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि हाल की घटनाओं से संघर्षग्रस्त समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत नाविकों और व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा काफी बढ़ गया है।
महानिदेशालय ने कहा है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों, भारतीय नाविकों के हताहत होने की घटनाओं तथा व्यापारी जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जहाज संचालकों और संबंधित एजेंसियों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने तथा भारतीय नाविकों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
वर्तमान घटना के बाद भी भारतीय दूतावास, समुद्री प्रशासन महानिदेशालय तथा संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और आवश्यकता पडऩे पर सभी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय हैं।

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