पाकिस्तान से बड़ी संख्या में लौट रहे अफगान नागरिकों के पुनर्वास में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। भारत सरकार ने अफगानिस्तान के शरणार्थी एवं पुनर्वास मंत्रालय को परिवारों के रहने के लिए फैमिली टेंट उपलब्ध कराए हैं। इन टेंटों का उपयोग पाकिस्तान से वापस लौट रहे नागरिकों के अस्थायी पुनर्वास और राहत कार्यों में किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि भारत हमेशा अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा रहा है। इसी मानवीय सहयोग के तहत अफगानिस्तान के शरणार्थी एवं पुनर्वास मंत्रालय को फैमिली टेंट सौंपे गए हैं, ताकि अपने देश लौट रहे लोगों को आवश्यक राहत और पुनर्वास सहायता मिल सके।
दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने बिना वैध दस्तावेज या वीजा के रह रहे अफगान नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार ने ऐसे लोगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर देश छोडऩे का निर्देश दिया था। समय सीमा समाप्त होने के बाद अफगान नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया और तेज हो गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान के ‘हाई कमीशन फॉर एड्रेसिंग रिटर्नीज इश्यूज’ ने बताया कि पिछले सप्ताहांत केवल 24 घंटे के भीतर 4,000 से अधिक अफगान नागरिक पाकिस्तान से वापस अपने देश लौटे। वहीं, पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, लांडी कोटल स्थित हमजा बाबा ट्रांजिट प्वाइंट पर लौटने वाले अफगानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी कार्रवाई के बाद प्रतिदिन 10,000 से अधिक अफगान नागरिक पाकिस्तान छोडक़र अफगानिस्तान लौट रहे हैं।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। यूएनएचसीआर के प्रवक्ता कैसर खान अफरीदी ने कहा कि संगठन विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है, जिन्हें ऐसे देश लौटना पड़ रहा है जहां उनके अधिकारों पर गंभीर खतरे हो सकते हैं। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से अपील की कि अफगान शरणार्थियों की वापसी स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से सुनिश्चित की जाए।
भारत की यह सहायता ऐसे समय में आई है, जब अफगानिस्तान लौट रहे हजारों विस्थापित नागरिकों को अस्थायी आवास और बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है।








