मध्य प्रदेश के धार जिले के चर्चित भोजशाला विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट इस बेहद संवेदनशील मामले की रोजाना सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह एक नाजुक मुद्दा है और वह इस ऐतिहासिक विवाद को हमेशा के लिए सुलझाने को तैयार है, इसलिए हिंदू और मुस्लिम, दोनों पक्षों को पूरी तरह से धैर्य बनाकर रखना होगा।
बेहद संवेदनशील है यह मामला, बरतनी होगी पूरी सावधानी
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की स्पेशल बेंच मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस अहम आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया गया था। सुनवाई के दौरान बेंच ने गंभीरता जताते हुए कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है। अदालत की कार्यवाही के दौरान जो भी कहा जा रहा है, उससे बिना वजह विवाद भडक़ सकते हैं या समाज में गलत संदेश जा सकता है, इसलिए कोर्ट को यहां इस्तेमाल किए जाने वाले हर एक शब्द को लेकर बहुत सावधान रहना होगा।
‘पहली बार आया ऐसा मामला, 10 से 15 दिनों में तय होगी बेंच’
अदालत में सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब किसी अंतरिम व्यवस्था से जुड़ा ऐसा पेचीदा मामला उनके सामने आ रहा है। इसके साथ ही अदालत हाईकोर्ट के आदेश और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में राज्य की बेबसी पर भी करीबी नजर रख रही है। कोर्ट ने अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा कि फिलहाल जो भी व्यवस्था लागू है, उसी के साथ इस पूरे मामले को आने वाले 10 से 15 दिनों के भीतर किसी उपयुक्त बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट किया जा सकता है।
मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से की थी जल्द सुनवाई की मांग
आपको बता दें कि इस मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। मुस्लिम पक्ष के याचिकाकर्ताओं की पैरवी करते हुए सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी और एडवोकेट निजाम पाशा ने सोमवार को बेंच के समक्ष इन याचिकाओं पर तुरंत सुनवाई करने का जोरदार आग्रह किया था। इस पर सीजेआई ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों को निर्देश दिया था कि वे पहले अपनी याचिकाओं में मौजूद तकनीकी कमियों को दूर करें और साथ ही यह पक्का भरोसा दिलाया था कि जल्द ही उन्हें किसी बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट कर दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने पलट दिया था दशकों पुराना आदेश, रद्द की थी नमाज
यह पूरा विवाद तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो महीने पहले एक बड़ा फैसला सुनाया था। 15 मई को दिए गए अपने एतिहासिक फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर वास्तव में देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने सख्त कदम उठाते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस दशकों पुराने आदेश को भी पूरी तरह से रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस विवादित जगह पर हर शुक्रवार को नमाज पढऩे की खास इजाजत दी गई थी।








