नीट में 5 बार असफल होने के बाद भी नहीं मानी हार, बिहार के प्रणव ने छठे प्रयास में हासिल की सरकारी मेडिकल कॉलेज की सीट

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किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में लगातार असफलता अक्सर छात्रों का आत्मविश्वास तोड़ देती है। कई अभ्यर्थी अपना सपना अधूरा छोड़ देते हैं, लेकिन बिहार के पूर्णिया निवासी प्रणव ने साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और लगातार प्रयास से असंभव दिखने वाला लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। नीट   परीक्षा में लगातार पांच बार असफल रहने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और छठे प्रयास में सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल कर लिया।
साधारण परिवार से निकलकर तय किया संघर्ष का सफर
प्रणव एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता कूरियर बॉय के रूप में काम करते थे, जबकि उनकी मां स्कूल शिक्षिका हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। प्रणव के अनुसार, डॉक्टर बनने का सपना उनकी मां का अधूरा सपना था, जिसे पूरा करने की प्रेरणा उन्हें लगातार मिलती रही।
लगातार पांच प्रयासों में मिली निराशा
प्रणव ने पहली बार वर्ष 2018 में नीट परीक्षा दी, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2019 में 466 और 2020 में 530 अंक प्राप्त हुए, फिर भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल सका। वर्ष 2021 में परीक्षा के दौरान घबराहट ने उनके प्रदर्शन को प्रभावित किया। वहीं, 2022 में कोविड-19 के दौरान पढ़ाई प्रभावित होने और ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण उनका स्कोर 557 तक ही पहुंच पाया, जो सरकारी सीट के लिए पर्याप्त नहीं था।
हार मानकर लिया क्चरूस् में दाखिला, दोस्तों ने फिर जगाया हौसला
लगातार असफलताओं के बाद प्रणव ने नीट की तैयारी छोडक़र बीएमएस (क्चरूस्) कोर्स में दाखिला ले लिया। हालांकि, उनके दोस्तों ने उनकी क्षमता पर भरोसा बनाए रखा और दोबारा प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद प्रणव ने अपनी तैयारी का तरीका पूरी तरह बदल दिया।
उन्होंने केवल दो महीनों में 40 से 50 मॉक टेस्ट हल किए और अपनी गलतियों को दर्ज करने के लिए ‘मिस्टेक कॉपी’ बनाई। हर टेस्ट के बाद वे अपनी कमजोरियों का विश्लेषण करते और उन्हें सुधारने पर विशेष ध्यान देते थे।
बदली रणनीति और मिली सफलता
नीट 2023 की परीक्षा में प्रणव ने घबराहट पर नियंत्रण रखते हुए शांत मन से प्रश्नपत्र हल किया। उन्होंने तय रणनीति के अनुसार समय का बेहतर प्रबंधन किया और सटीक तैयारी के दम पर अच्छा स्कोर हासिल किया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिल गया।
अभ्यर्थियों को दिया खास संदेश
प्रणव का कहना है कि उनकी पांच असफलताएं व्यर्थ नहीं गईं, बल्कि उन्हीं से उन्होंने सबसे अधिक सीखा। उनका मानना है कि कम अंक आने पर हार मानने के बजाय अपनी गलतियों की पहचान कर उन्हें सुधारना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। वे सभी नीट अभ्यर्थियों से निरंतर अभ्यास, आत्मविश्लेषण और धैर्य बनाए रखने की अपील करते हैं।
प्रणव की सफलता की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार की असफलताओं के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।

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