श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना हुआ साकार, बंगाल में बनी हमारी सरकार: रेखा गुप्ता

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देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर मंगलवार को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. दिल्ली गेट स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क में आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, सांसद मनोज तिवारी, योगेंद्र चंदोलिया, बांसुरी स्वराज, स्वाति मालीवाल, दिल्ली सरकार में मंत्री पंकज सिंह और रविंद्र इंद्राज समेत अनेक विधायक, पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हर्ष मल्होत्रा ने पौधारोपण भी किया.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मौके पर सभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग और समर्पण का प्रतीक है. मुख्यमंत्री ने कहा, आज का दिन उस महान व्यक्तित्व को याद करने का अवसर है, जिसने भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक नींव रखी. भाजपा आज जिस विशाल वटवृक्ष के रूप में देशभर में खड़ी है, उसके बीज डॉ. मुखर्जी ने ही बोए थे. रेखा गुप्ता ने आगे कहा कि राष्ट्र प्रथम की भावना, जिसके साथ आज भाजपा कार्य कर रही है, डॉ. मुखर्जी की सोच और सिद्धांतों से प्रेरित है. उन्होंने उनके उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें पूरे देश में एक संविधान, एक निशान और एक प्रधान की व्यवस्था की बात कही गई थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा उनके बताए मार्ग पर चलते हुए जनहित और राष्ट्रहित में कार्य करती रहेगी.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, मुखर्जी ने ही यह नारा दिया था कि देश में एक संविधान एक प्रावधान चलेगा. जिस दिन बंगाल में भाजपा की सरकार बनी, वह उन्हें दूसरी श्रद्धांजलि थी. भाजपा भी उनके दिए गए मार्ग पर जनहित में काम करेगी.
वहीं, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को समझे बिना भारतीय राजनीति और राष्ट्रवाद की अवधारणा को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता. उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी की मृत्यु आज भी कई सवाल खड़े करती है और उनकी मां द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लिखा गया पत्र उस पीड़ा का प्रमाण है, जिसे देश ने महसूस किया था. कार्यक्रम में वक्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके वैचारिक साहस और राष्ट्रीय एकता के लिए किए गए संघर्ष को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

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