आयुष्मान कार्ड होने पर भी अस्पताल ने वसूले 7.25 लाख, मरीज की मौत के बाद पत्नी ने कोर्ट में चटाई धूल; अब अस्पताल भरेगा जुर्माना

Join Us

चरखी दादरी (ए)। हरियाणा से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है जो आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज की उम्मीद रखने वालों के लिए एक बड़ी मिसाल बन गया है। एक निजी अस्पताल की मनमानी का शिकार हुए परिवार ने हार नहीं मानी और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अस्पताल को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद एक गरीब मरीज से 7.25 लाख रुपये की भारी रकम वसूल ली थी। दुखद बात यह रही कि इतना पैसा खर्च करने के बाद भी मरीज की जान नहीं बच सकी। अब उपभोक्ता अदालत ने अस्पताल की इस लूट पर कड़ी फटकार लगाते हुए लाखों रुपये लौटाने और जुर्माना भरने का सख्त आदेश दिया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 12 जून 2024 को महिला के पति को पेट दर्द और सांस लेने में गंभीर तकलीफ के बाद रोहतक के पॉजिट्रॉन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज और उसकी पत्नी आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी थे, जिसमें उन्हें 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलनी थी। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने महिला से 7.25 लाख रुपये की मोटी रकम यह कहकर ऐंठ ली कि अप्रूवल मिलने के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे। पति की जान बचाने के लिए बेबस पत्नी ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर बिल चुकाया, लेकिन इलाज के बावजूद 26 जून को मरीज की मौत हो गई।
पति की मृत्यु के बाद जब पीडि़त महिला ने अस्पताल से 5 लाख रुपये के रिफंड की मांग की, तो अस्पताल प्रबंधन ने पैसे लौटाने से साफ मना कर दिया। अपना बचाव करते हुए अस्पताल ने तर्क दिया कि मरीज ‘एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस’ और ‘सेप्सिस’ से पीडि़त था, जिसका इलाज इस योजना के तहत कवर नहीं होता। अस्पताल की दलील थी कि वे आयुष्मान योजना के तहत सिर्फ हृदय रोग के लिए पैनल में शामिल हैं और परिजनों की सहमति के बाद ही मरीज को ‘कैश पेशेंट’ के रूप में भर्ती किया गया था। अस्पताल की इस बेशर्मी के बाद महिला ने न्याय के लिए चरखी दादरी जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।चरखी दादरी जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की गहराई से सुनवाई करते हुए अस्पताल की सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि अस्पताल ऐसा कोई भी पुख्ता सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा जो यह साबित करे कि मरीज का इलाज आयुष्मान योजना के दायरे से बाहर था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अस्पताल और प्राधिकरण के बीच हुए समझौते के ‘क्लॉज 13’ में चिकित्सा उपचार का दायरा बहुत व्यापक है और यह केवल हृदय रोगों तक सीमित नहीं है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक योग्य लाभार्थी से इतनी बड़ी रकम वसूलना सेवा में साफ तौर पर कमी है और इस रवैये ने कल्याणकारी योजना के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर दिया है।

विधवा पत्नी को मिलेगा लाखों का रिफंड और भारी मुआवजा

उपभोक्ता अदालत ने गरीब और बेसहारा महिला के हक में कड़ा फैसला सुनाते हुए पॉजिट्रॉन अस्पताल को तुरंत प्रभाव से पैसे लौटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेशानुसार, अस्पताल को अब इलाज के नाम पर वसूली गई अतिरिक्त रकम के रूप में 5 लाख रुपये का पूरा रिफंड देना होगा। इसके साथ ही महिला को हुए मानसिक उत्पीडऩ और भावनात्मक आघात के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा और अदालती कार्यवाही के खर्च के तौर पर 10,000 रुपये अलग से चुकाने होंगे। कुल मिलाकर अब अस्पताल को 5.60 लाख रुपये का भुगतान करना होगा, जो मरीजों को लूटने वाले अस्पतालों के लिए एक सख्त चेतावनी है।

Previous articleकोलकाता ब्लास्ट: 70 लोगों की जान लेने वाले टाडा दोषी को नहीं मिलेगी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई पर लगाई रोक