कोलकाता ब्लास्ट: 70 लोगों की जान लेने वाले टाडा दोषी को नहीं मिलेगी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई पर लगाई रोक

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नई दिल्ली,(आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 1993 के कोलकाता बउबाजार बम ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे एक दोषी को समय से पहले रिहा करने का निर्देश दिया गया था. इस मामले की सुनवाई जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने की।
सुप्रीम कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दायर उस याचिका पर पारित किया, जिसमें हाई कोर्ट के 5 जून के आदेश को चुनौती दी गई थी. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में 77 वर्षीय दोषी मोहम्मद राशिद खान को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया था. पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू पेश हुए. राज्य सरकार ने दलील दी कि राज्य के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड द्वारा दोषी की रिहाई के खिलाफ सिफारिश किए जाने के बावजूद हाई कोर्ट ने यह राहत दे दी.सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर खान को नोटिस भी जारी किया, जिसे टाडा के सख्त प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था. सुनवाई के दौरान, खान का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील एम.आर. शमशाद ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने जेल में 33 साल से अधिक का समय बिताया है. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इसी मामले के एक सह-आरोपी, पन्नालाल जायसवाल को मार्च 2014 में सजा से छूट दे दी गई थी। हालांकि, पीठ ने कहा कि उन दोनों की भूमिकाएं पूरी तरह से अलग थीं. पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि खान इस घटना का मास्टरमाइंड था. पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने दलील दी कि हाई कोर्ट ने ऐसे मामले में खान को राहत देने के लिए सुधारात्मक सिद्धांत पर भरोसा करके गलती की है, जहां बम धमाकों में 70 से अधिक लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे. शमशाद ने कहा कि जेल में कैदी के अच्छे आचरण को ध्यान में रखा जाना चाहिए.पीठ ने टिप्पणी की कि उसे एक ऐसे कृत्य के लिए सजा सुनाई गई थी जो लगभग एक आतंकवादी कृत्य था. खान के वकील ने उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति पर जोर दिया. पीठ ने कहा कि यदि हाई कोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई गई, तो राज्य सरकार की अपील निष्प्रभावी हो जाएगी।

 

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