नपाध्यक्ष बनने का सपना देखने वालों के मन में फूटने लगे लड्डू

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नगरपालिका संशोधन बिल हुआ पास, संभाग मुख्यालय की नगर पालिका के लिए दो दर्जन रहेंगे दावेदार

बलराम शर्मा

नर्मदापुरम। भोपाल नगर का प्रथम नागरिक बनने के लिए शहर के उन लोगों के मन में लड्डू फूटने लगा है जो कई वर्षों से जनता द्वारा सीधे अध्यक्ष चुनाव होने का इंतजार कर रहे हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा ने नगरीय निकाय चुनावों से संबंधित 2025 का संशोधन विधेयक पारित कर दिया है। जिससे अब नगर पालिका व नगर परिषद अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली सेे होगा। ऐसा पूर्व में हो चुका है। अब 2027 से मतदाता सीधे अध्यक्ष चुनेंगे। विधेयक के द्वारा राइट टू रिकॉल की सुविधा से स्थानीय शासन में जवाबदेही व पारदर्शिता बढ़ेगी। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन नगरीय निकाय चुनावों से संबंधित एक बड़ा बदलाव हो गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने विधानसभा में नगरपालिका द्वितीय ध्वनिमत से पारित करा दिया। इससे अब नगरपालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों का चुनाव दोबारा प्रत्यक्ष प्रणाली से होने से अनेक दावेदार अभी से मन बनानेे लगे हैं। संभाग मुख्यालय की नगर पालिका में वर्तमान में पिछड़ा वर्ग की महिला अध्यक्ष पद पर हैं। जो पार्षदों के द्वारा चुनी गई हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा अब तो शहर के मतदाता अपना वोट देकर अध्यक्ष का चुनाव करेंगे।

एक साल के बाद होना है चुनाव

नगर पालिका का कार्यकाल 2027 में पूरा होना है। उसके बाद नए अध्यक्ष का चुनाव सीधे मतदाता के द्वारा होना है। वर्तमान में अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित हुआ था। इसलिए नीतू यादव अध्यक्ष है। लेकिन आने वाले नगर पालिका के अध्यक्ष को लेकर घमाशान होना तय है। संभावना है कि आने वाला अध्यक्ष पद अनारक्षित होना है। इस कारण भी एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितार्थ होगी। दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस से ही एक एक दर्जन दावेदार सामने आएंगे। वहीं अन्य दलों व निर्दलीय लोग भी अध्यक्ष पद के लिए अपनी किश्मत अजमाएंगे। इसलिए अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों संख्या दो दर्जन से कहीं ज्यादा रहना है।

पूर्व में भी जनता चुनती रही है अध्यक्ष

जनता द्वारा अध्यक्ष चुनने का विधेयक जरूर पास हो गया है। लेकिन पहले भी ऐसा होता रहा है। वर्ष 1999 से 2014 तक अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होता रहा है। उसके बाद 2022 में यह प्रणाली बदलकर पार्षदों के द्वारा अध्यक्ष चुनने की प्रणाली कर दी थी।

अध्यक्ष का कार्याकल बढ़ने की संभावना

ऐसी भी संभावना है कि विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। उससे पूर्व नगरीय निकाय चुनाव 2027 में होना है। लेकिन किसी भी चुनाव में नगरीय निकाय का विशेष महत्व है। वर्तमान में पूरे मप्र में भाजपा का नगरीय निकाय में वर्चस्व है। ऐसा भी हो सकता है कि सरकार पहले नपा का कार्यकाल छ माह बढ़ा दे उसके बाद फिर छह माह बढ़ाकर पहले विधान सभा चुनाव को हरिझंडी मिल जाए उसके बाद नगरीय निकाय चुनाव विधानसभा चुनाव तक के लिए टाल दिए जाएं। लेकिन इसकी संभावना कम ही है क्योंकि नगरीय निकाय के अध्यक्ष के चुनाव के लिए विधेयक पास होने से अब सभी चाहेंगे कि चुनाव समय पर ही होें।

फिर कब मिलेगा मौका?

शहर के अनेक अध्यक्ष पद के दावेदारों के द्वारा अब और तेजी से तैयारी की जाएगी। क्योंकि एक वर्ष का समय बचा है। जो अध्यक्ष पद के दावेदार हैं उनका मानना है कि आरक्षण के कारण कई लोगों को माैका नहीं मिल पाता है। अनारक्षित होने पर यह सोच कर चुनाव मैंदान में उतरेंगे कि अब फिर कब मौका मिलेगा?

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