स्थानीय प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस तथा विधि महाविद्यालय, सीहोर में 01 नवम्बर 2025 को मध्यप्रदेष का 70वॉं स्थापना दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती पूजन, राष्ट्रगीत वन्देमातरम तथा मध्यप्रदेष की गौरव गाथा को प्रदर्षित करने वाले मध्यप्रदेष गान के साथ हुआ।
सर्वप्रथम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रोहिताष्व कुमार शर्मा ने अतिथियों के लिये स्वागत उद्बोधन दिया तथा विद्यार्थियों का मार्गदर्षन करते हुये मध्यप्रदेष की गौरवषाली विरासत का संरक्षण तथा उसकी विकास यात्रा का सहभागी बनने की प्ररेणा दी। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हम आत्म विष्लेषण करें कि हम कौन थे और अब कहॉं पर हैं, ‘हम न सोचें हमें क्या मिला है हम ये सोंचे किया क्या है अर्पण’ ये मध्यप्रदेष की हृदय की आवाज होना चाहिए।
मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त प्राचार्य तथा षिक्षाविद् डॉ. बी.सी. जैन ने मध्यप्रदेष की गौरव गाथा का बखान करते हुये विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रदेष को अग्रणी प्रदेषों की पंक्ति में खड़ा करने के लिये कुछ ऐसा करें कि प्रदेषवासी अनुषासित हों, ईमानदार हों और भ्रष्टाचार से दूर रहकर पारदर्षी प्रषासन का हिस्सा बनें।
मूर्धन्य साहित्यकार, समाजसेवी तथा पत्रकार विषेष अतिथि श्री शैलेष तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेष की उत्पत्ति एक स्वंयभू राज्य के रूप में हुई। यह भारत का हृदय प्रदेष है इसीलिए यह उदार है तथा सांस्कृतिक तथा भौगोलिक दृष्टि से विविधताओं का प्रदेष है। इस प्रदेष को विकसित करने के लिये अतीत के प्रसंगों से सीख लेकर वर्तमान का शोध करना चाहिए और भविष्य की संभावनाओं की तालाष करना चाहिए।
वरिष्ठ सामाजसेवी तथा चिंतक श्री सुरेषचन्द्र वषिष्ठ ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुये कहा कि इस मध्यप्रदेष स्थापना दिवस के अवसर पर हम यह प्रतिज्ञा करें कि हम अपने अधिकारों के प्रति सजग तो रहे परन्तु हम केवल हितग्राही न बनें बल्कि संगठित होकर जागरूक रहकर अपने राज्य के विकास का बीड़ा भी उठायें, अपने नैतिक स्तर को उंचा उठायें ताकि प्रत्येक नागरिक में कर्त्तव्य बोध जागृत हो सके।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. देवेन्द्र वरवड़े तथा आभार प्रदर्षन डॉ. शीलचन्द्र गुप्ता ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेष स्थापना दिवस समारोह के कार्यक्रम 03 नवम्बर 2025 तक अनवरत जारी रहेंगें। जिसमें विद्यार्थी के लिये सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता तथा फोटोचित्र प्रदर्षनी के आयोजन होंगे।
सर्वप्रथम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रोहिताष्व कुमार शर्मा ने अतिथियों के लिये स्वागत उद्बोधन दिया तथा विद्यार्थियों का मार्गदर्षन करते हुये मध्यप्रदेष की गौरवषाली विरासत का संरक्षण तथा उसकी विकास यात्रा का सहभागी बनने की प्ररेणा दी। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हम आत्म विष्लेषण करें कि हम कौन थे और अब कहॉं पर हैं, ‘हम न सोचें हमें क्या मिला है हम ये सोंचे किया क्या है अर्पण’ ये मध्यप्रदेष की हृदय की आवाज होना चाहिए।
मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त प्राचार्य तथा षिक्षाविद् डॉ. बी.सी. जैन ने मध्यप्रदेष की गौरव गाथा का बखान करते हुये विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रदेष को अग्रणी प्रदेषों की पंक्ति में खड़ा करने के लिये कुछ ऐसा करें कि प्रदेषवासी अनुषासित हों, ईमानदार हों और भ्रष्टाचार से दूर रहकर पारदर्षी प्रषासन का हिस्सा बनें।
मूर्धन्य साहित्यकार, समाजसेवी तथा पत्रकार विषेष अतिथि श्री शैलेष तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेष की उत्पत्ति एक स्वंयभू राज्य के रूप में हुई। यह भारत का हृदय प्रदेष है इसीलिए यह उदार है तथा सांस्कृतिक तथा भौगोलिक दृष्टि से विविधताओं का प्रदेष है। इस प्रदेष को विकसित करने के लिये अतीत के प्रसंगों से सीख लेकर वर्तमान का शोध करना चाहिए और भविष्य की संभावनाओं की तालाष करना चाहिए।
वरिष्ठ सामाजसेवी तथा चिंतक श्री सुरेषचन्द्र वषिष्ठ ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुये कहा कि इस मध्यप्रदेष स्थापना दिवस के अवसर पर हम यह प्रतिज्ञा करें कि हम अपने अधिकारों के प्रति सजग तो रहे परन्तु हम केवल हितग्राही न बनें बल्कि संगठित होकर जागरूक रहकर अपने राज्य के विकास का बीड़ा भी उठायें, अपने नैतिक स्तर को उंचा उठायें ताकि प्रत्येक नागरिक में कर्त्तव्य बोध जागृत हो सके।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. देवेन्द्र वरवड़े तथा आभार प्रदर्षन डॉ. शीलचन्द्र गुप्ता ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेष स्थापना दिवस समारोह के कार्यक्रम 03 नवम्बर 2025 तक अनवरत जारी रहेंगें। जिसमें विद्यार्थी के लिये सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता तथा फोटोचित्र प्रदर्षनी के आयोजन होंगे।
डॉ. रोहिताष्व कुमार शर्मा








