भारत में आज भी कई कानून अंग्रेजों के जमाने के हैं-अश्विनी उपाध्याय

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सीहोर। भारत में आज भी कई कानून अंग्रेजों के जमाने के हैं, जो देश की संप्रभुता के लिए ठीक नहीं हैं और इन्हें बदलने की जरूरत है। उक्त विचार सहकार भारती के तत्वाधान में सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मैं भारत, मेरा युवा की रैली में सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय मुख्य वक्ता के रूप में कहे।
सहकार भारती द्वारा कार्यक्रम, में भारत मेरा युवा  के संयोजक डॉ. गगन नामदेव ने बताया कि शुक्रवार को दोपहर साढ़े तीन बजे मुख्य वक्ता श्री उपाध्याय का क्षेत्रवासियों ने क्षेत्र के सोया चौपाल पर भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर रैली के रूप में शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए क्रिसेंट के सभाकक्ष में पहुंचे, जहां पर मुख्य अतिथि विधायक सुदेश राय, विशेष अतिथि समाजसेवी अखिलेश राय, सहकार भारती के सुरेश गुप्ता और सुरेश वशिष्ठ आदि ने स्वागत सम्मान किया। इस मौके पर उन्होंने कहाकि बारिश की बौछारों के उपरांत पर आप लोग इतनी बड़ी संख्या में आए है, इसके लिए आप सभी का मैं आभारी हूं। उन्होंने कहाकि अब तक सैकड़ों कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, लेकिन इतनी अधिक संख्या विषम मौसम के बाद भी यहां पर आना बहुत बड़ी बात है।
उन्होंने अपने विभिन्न बयानों और जनहित याचिकाओं के माध्यम से इस बात पर जोर दिया है कि भारत की कानूनी व्यवस्था में कई ऐसे औपनिवेशिक युग के कानून हैं, जिन्हें खत्म किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि ये कानून भारत के हित में नहीं हैं।  अश्विनी उपाध्याय ने विशेष रूप से यह भी कहा है कि मुगलों और अंग्रेजों से संबंधित कुछ मुद्दों पर कानूनी ढांचे में बदलाव की आवश्यकता है, जैसे कि ऐतिहासिक स्थानों के नाम बदलना और पूजा स्थल अधिनियम। उन्होंने यह दावा किया है कि ये कानून गुलामी की मानसिकता को बढ़ावा देते हैं। संक्षेप में, उनका मुख्य जोर इस बात पर है कि देश को आगे बढऩे के लिए पुराने, औपनिवेशिक कानूनों को हटाकर नए, भारतीय-केंद्रित कानून बनाने चाहिए।
कार्यक्रम में दीपेंद्र, उदित सोनी, अनु चौहान, रजत व्यास, राहुल  विजयवर्गीय, अक्षय साहू, आदित्य मिश्रा, गोविंद मीणा, सुनील जैन, एडवोकेट दीपक सिंह, सिद्धार्थ गांधी, शुभम जोशी सह संयोजक के रूप में उपस्थित रहे।

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