नर्मदापुरम। शहर में अन्य धार्मिक पर्वों की तरह आंवला नवमी का पर्व भी श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया जाएगा। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी के अवसर पर महिलाएं आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर संतान व परिवार सुख शांति की प्राप्ति व उसकी रक्षा के लिए पूजा करेंगी। हैं। कार्तिक माह में स्नान के पर्व में नवमी को स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति हेाती है। आचार्य पं नीरजेश त्रिपाठी ने बताया कि इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे भोजन बनाने और उसे ग्रहण करने का विशेष महत्त्व है। आंवले के पेड़ के पास जाना चाहिए और उसके आस.पास सफाई करके पेड़ की जड़ में साफ जल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद पेड़ की जड़ में दूध अर्पित करना चाहिए। पूजन सामग्रियों से पेड़ की पूजा की जाती है। उसके तने पर कच्चा सूत या मौली लेकर परिक्रमा करते हुए लपेटा जाएगा। शहर के नेहरू पार्क, हर्बल पार्क, मां हिंगलाज देवी परिसर, खेत खलियानों घरों पार्काें सहित अन्य अनेक स्थानों पर आज आंवला के वृक्ष की पूजन की जाएगी। आचार्य पं अभिलाष शर्मा ने बताया कि आंवला नवमी के दिन ही भगवान विष्णु ने कुष्माण्डक नामक दैत्य को मारा था। आंवला नवमी पर ही भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध करने से पहले तीन वनों की परिक्रमा की थी। आंवला नवमी पर बहुत से लोग मथुरा वृंदावन की परिक्रमा करते हैं। संतान प्राप्ति के लिए की गई पूजा पर व्रत भी रखा जाता है और इस दिन रात में भगवान विष्णु को याद करते हुए जागरण भी किया जाता है। आंवला नवमी शहर में काफी उत्साह के साथ मनाई जाएगी। कई लोग अपने खेत में कृषि फार्म में लगे हुए आंवला के पेड की पूजन करते हुए वहीं पर भोजन सामग्री ग्रहण करेंगे।






