मंदिर के चारों तरफ छाई हुई है हरियाली
बलराम शर्मा
नर्मदापुरम। देवीदेवताओं के मंदिरों के शहर तीर्थ स्थल नर्मदानगरी नर्मदापुरम में प्राय: सभी देवी देवताओं के प्रसिद्ध व आकर्षक मंदिर आकर्षण का केंद्र हैं। शारदीय नवरात्र के शुभारंभ से ही देवी मंदिरों में धार्मिक आयोजन हो रहे। सभी मंदिरों में पूजन पाठ के क्रम जारी रहे। देवी भक्तों के द्वारा व्रतोपासना की जा रही है। अनेक स्थानों पर घट स्थापना के साथ ही देवी मूर्ति की स्थापना की गई। अन्य मंदिरों के साथ ही कोठीबाजार में स्थित आदिशक्ति मंदिर में सुबह से जल चढ़ाने वालों का तांता लग जाता है। शाम को भजन कीर्तन आरती के बाद देवी जस होते हैं। आदिशक्ति मंदिर में देवी भ्क्तों के द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना के साथ ही धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। आदिशक्ति मंदिर की स्थापना को 21 वर्ष हो चुके हैं।
मंदिर का संक्षिप्त इतिहास
मंदिर के व्यवस्थापक व पुजारी पं प्रकाश तिवारी ने बताया कि 25 वर्ष पूर्व यहां पर पहले एक छोटी मूर्ति थी। छोटी सी मढ़िया थी। यहां पर शहर के प्रसिद्ध पुरोहित पंडित बटुक महाराज के आचार्यत्व में देवी की मूर्ति की स्थापना विधि विधान व षोषडोपचार के साथ की गई थी। उसके बाद यहां पर जयपुर राजस्थान से मातारानी की मूर्ति लाकर विधिवत स्थापना की गई है। दोनों नवरात्र में यहां पर भजन कीर्तन व अन्य देवी आराधना का क्रम जारी रहता है। मंदिर के गर्भग्रह में ज्योति व जवारे रखने का स्थान है। जहां पर आम लोगों का प्रवेश वर्जित है। मंदिर में हमेशा हर धार्मिक पर्व त्योहार पर अनुष्ठान, भजन कीर्तन के आयोेजन के साथ ही सामाजिक कार्यक्रम किए जाते हैं। अष्टमी को महारानी की महाआरती की जाती है। भंडारे का आयोजन भी होता है। एक विशेषता यह भी है कि मंदिर बनने के बाद से यहां के रिक्त परिसर में शारदीय नवरात्र से दो माह पूर्व से कोलकोता के प्रसिद्ध मूर्तिकार दिवाकर पाल व अन्य अनेक कलाकार मूर्तियां बनाते हैं। जो क्षेत्र के अनेक स्थानों पर यहां से मूर्तियां जाती हैं।
चारों तरफ हरियाली
पं तिवारी का कहना है कि शहर में मंदिर तो बहुत हैं। अनेक मंदिरों में वृक्ष भी हैं। लेकिन मंदिर के आसपास चारों तरफ वृक्ष हों ऐसे मंदिर कम ही हैं। कोठीबाजार के आदिशक्ति मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि यहां पर चारों तरफ हरियाली छाई हुई है। यहां पर स्वदेशी वृक्षों के साथ औषधीय पौधे भी मौजूद हैं। यहां पर अनेक धार्मिक कार्यक्रम वर्ष भर होते रहते हैं। हर दिन पूजन आरती का क्रम जारी रहता है।






