100 साल से अधिक प्राचीन है देवी स्थान, मंदिर को हो रहे हैं 50 साल

Join Us

::::: नवरात्र महोत्सव ::::: नगर के मध्य में स्थित मातारानी के मंदिरों की महिमा :::::

पुराने होशंगाबाद का प्राचीन देवी स्थान है जुमेराती का माता महाकाली मंदिर परिसर

बलराम शर्मा

नर्मदापुरम। पुराने होशंगाबाद का खास स्थान है जुमेराती माता महाकाली का मंदिर। पुराना होशंगााबाद भीलपुरा वाला क्षेत्र कहलाता है। उससे लगा हुआ हिस्सा जुमेराती है। यहां पर चौराहे पर विराजमान हैं माता महाकाली। इस मंदिर और स्थान की अनेक विशेषताएं हैं। एक तो नर्मदा तट पर सबसे पास के विशाल देवी मंदिरों में यह मंदिर शामिल है। मंगलवारा घाट के पास ही स्थित है। यहां पर वर्ष भर देवी आराधना के साथ भजन कीर्तन सहित अनेक धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। आसपास क्षेत्र के श्रद्धालु मंदिर में जल चढ़ाकर देवी मां से मन्नत मांगते हैं। जिससे उनकी मनोकामना पूरी हाेती हैं। शारदीय नवरात्र महोत्सव के दौरान यहां पर पंडित सोमेश परसाई के आचार्यत्व में कई वर्षों से शतचंडी महायज्ञ का आयोजन होता आ रहा है। जिसमें माता महाकाली समिति सदस्यों, आसपास क्षेत्र के नागरिकों के साथ ही शहर के अनेक श्रद्धालु श्रद्धाभाव से शामलि होते हैं। पं बोहरे परिवार का भी योगदान रहता है।

मंदिर का संक्षिप्त इतिहास

प्राचीन समय से शहर में तीन स्थानों पर माता महाकाली के बड़े मंदिर हैं। जिनमें सबसे प्राचीन मंदिर जुमेराती माता महाकाली का यह स्थान है जिसमें अब मंदिर का बड़ा रूप हो गया है। माता महाकाली मंदिर समिति के सदस्य व नागरिक बताते हैं कि यह शहर की पुरानी बस्ती का प्रमुख धार्मिक क्षेत्र है। जो भीलपुरा से लगा हुआ है। यहां पर शताधिक वर्ष पूर्व देवी मां की मढ़िया थी। उसके बाद मंदिर बनाया गया। जिसे करीब 50 वर्ष हो गए। इसी मंदिर को विशाल रूप दिया गया है। इसे ही 21 वर्ष से अधिक समय हो रहा है।

मंदिर में वर्षों से अपनी सेवाएं देने वाले पूर्व पार्षद पं नवीन कुमार दीपू पालीवाल ने बताया कि माता महाकाली के इस स्थान की अनेक विशेषताएं हैं। यहां शारदीय नवरात्र में स्थापित की जाने वाली प्रतिमा विसर्जन से पूर्व दशहरे के दिन दशहरे मैदान में होने वाली रामलीला में विजयादशमी के दिन जिस समय भगवान राम और रावण का युद्ध होता है उस दौरान गाजे बाजे के साथ शाम के समय जुमेराती माता महाकाली कमेटी के सभी सदस्य उत्साह व उमंग के साथ प्रतिमा लेकर दशहरे मैदान में पहुंचते हैं। जहां रामलीला समिति के सदस्य पूजन और माता महाकाली समिति के सदस्यों का स्वागत रामलीला समिति करती है। उसके बाद ही रावण के पुतले का दहन होता है। ऐसी अनेक विशेषताओं वाला स्थान है देवी मां का जुमेराती का स्थान।

Previous articleइलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की राहुल गांधी की याचिका, सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता पर बयान का मामला
Next articleआदिशक्ति मंदिर में देवी की प्राण प्रतिष्ठा की है आचार्य बटुक महाराज ने