ग्राम छतरपुर में जारी-सुदामा चरित्र के साथ हुआ भागवत कथा का समापन

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 जगदगुरु पंडित अजय पुरोहित ने कहा नि:स्वार्थ मित्रता कृष्ण सुदामा जैसी
ग्राम छतरपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
सीहोर। ग्राम छतरपुर में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के अंतिम दिवस भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर जगदगुरु पंडित अजय पुरोहित ने कहाकि मित्रता हो तो श्रीकृष्ण सुदामा जैसी। यह कलयुग में मित्रता का अनूठा उदाहरण है। जिसमें सच्चा मित्र वहीं है, जो अपने मित्र का मुसीबत में साथ दे। कथा श्रवण कर श्रोता भाव विभोर हो गए। कथा के समापन के पूर्व भगवान की आरती की गई। कथा में श्रद्धालु जम कर नाचे। महाआरती के बाद कथा का समापन हुआ।
शुक्रवार को कथा के अंतिम दिवस जगद गुरु पंडित श्री पुरोहित ने भगवान श्री कृष्ण के जीवन से शिक्षा लेने की बात कही। उन्होंने कहा भगवान श्री कृष्ण का जीवन ही संघर्ष पूर्ण रहा उन्होंने जन्म से लेकर जीवन पर्यंत कठिन समस्याओं का सामना किया। सबके साथ रहते हुए भी निर्लिप्त रहे और योगेश्वर कहलाए। कथा में भगवान के विभिन्न लीलाओं से सीख लेने और जीवन में उतरने की सलाह दी।
भगवान कृष्ण और उद्धव के सुंदर प्रसंग
कथा के अंतिम दिवस उन्होंने भगवान कृष्ण और उद्धव के सुंदर प्रसंग का वर्णन किया। इसे सुनकर सभी श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। एक समय भगवान श्री कृष्ण उदास बैठे थे, तभी उनके मित्र व परम भक्त उद्धव जी उनके पास आए और उनसे पूछा कि हे वासुदेव ऐसी कौन सी बात है, जिससे आप उदास हैं। तब श्री कृष्ण ने कहा कि हमें गोपियों की याद सता रही है। आप गोकुल जाओ और गोपियों को समझाओ कि कृष्ण जल्द गोकुल लौटेंगे। जब उद्धव ने गोपियों से श्रीकृष्ण प्रेम मोह छोड़ने की बात कही तो गोपियों ने कहा कि जिसे प्रेम का ज्ञान नहीं, वह ज्ञानी नहीं हो सकता। गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम देख उद्धव का अभिमान चूर चूर हो गया।

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