शिव पार्वती की पूजन अर्चन की, मालपुए का लगाया भोग
नर्मदापुरम। भादों माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी के अवसर पर शनिवार को संतान सप्तमी का व्रत महिलाओं ने किया। अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत, खुशहाली और संपन्नता के लिए पुत्रवती महिलाओं ने संतान सप्तमी का व्रत रखा। इस अवसर पर दोपहर के समय भगवान शिव-पार्वती का पूजन किया गया। इस दिन चांदी की चूड़ियां पूजन करके पहनने की परंपरा है। बाजार में साल में एक बार ही संतान सप्तमी के अवसर पर चांदी की चूड़ियां बड़ी मात्रा में बिकती हैं। बीते कुछ दिन से सराफा बाजार में चांदी की चूड़ियाें की अच्छी खासी बिक्री हुई। व्यापारी हीरालाल सोनी ने बताया कि इस बार चांदी के दामों में उछाल रहने से 10 ग्राम की चूड़ी 700 रुपये के हिसाब से बिकी हैं।
द्वापर युग से चली आ रही है परंपरा
आचार्य पं नीरजेश त्रिपाठी ने बताया कि भादप्रद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को संतान सप्तमी कहा जाता है। इस दिन माताएं अपने पुत्र एवं पुत्री की दीर्घायु कुशलता तथा उनके सुखद भविष्य के लिए उपवास रहकर प्रार्थना करती हैं। उन्होने बनाया कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण एवं बलदाऊ की रक्षा के लिए देवकी ने व्रत रखा था तब से यह परंपरा चली आ रही है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र की सभी माताएं अपनी संतान के लिए व्रत रखती है।
मंदिरों में भी हुई पूजन अर्चन
सुबह नर्मदा जी में स्नानकर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा अर्चना शुरू हुई। नर्मदा तट के सभी प्रमुख घाटों पर सुबह से ही महिलाएं पहुंच रही थी। अनेक महिलाएं विवेकानंद घाट के मंदिर में पूजा अर्चना कर रही थीं। अन्य घाटों पर भी स्नान के बाद देव मंदिरों में पूजन अर्चन का सिलसिला जारी रहा।
मालपुए का लगाया भोग
व्रत पर्व के अवसर पर कई महिलाओं ने अपने घरों पर ही पड़ोस की महिलाओं के साथ पूजन अर्चन की। संतान सप्तमी के मौके पर महिलाओं ने सात मालपुए बनाकर भगवान को भोग लगाया। सात पुए खाकर ही महिलाओं ने व्रत रखा। इस दिन चांदी के कड़े को पूजन स्थल में रखा जाता है। इस कारण चांदी के कड़े अर्थात चूडियों की खूब खरीदी हुई। इसके साथ ही घाटों के पास लगी फूल मालाओं व पूजन सामग्री की भी खूब बिक्री हुई।






