व्रतधारी महिलाओं ने समूह में एकत्रित होकर की सप्त ऋषियोंकी पूजन
नर्मदापुरम। भादों माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी के अवसर पर महिलाओं ने ऋषि पंचमी का व्रत विधिविधान से किया। इस अवसर पर सबसे पहले नर्मदा तट पर पहुंचकर व्रतधारी महिलाओं ने मां नर्मदा में डुबकी लगाई। स्नान से पूर्व अद्धाझारे पौधे की 108 दातुन से मुंह साफ किया,इसके बाद उसके 108 पत्तों को सिर पर रख कर 108 बार लोटे से नर्मदा जल भर कर स्नान किया। इस कारण नर्मदा तट के सभी प्रमुख घाटों पर महिलाओं की सर्वाधिक भीड़ रही। स्नान का क्रम सुबह से ही शुरू हो गया था जो दोपहर तक जारी रहा। इसके बाद महिलाअाें ने एक स्थान पर समूह में एकत्रित होकर केले के पत्ते पर सप्तऋषियों की आकृति उकेर कर उनकी पूजन अर्चन की। पंडित को बुलाकर ऋषि पंचमी व्रत की कथा सुनने के बाद प्रसाद वितरण किया गया। महिलाओं के समूह अलग अलग मोहल्लों में अलग स्थानों पर पूजन करने में जुटे हुए थे।
पं सोरभ तिवारी ने कहा कि समाज को धार्मिक आध्यात्मिक और नैतिक मार्गदर्शन देने वाले महान ऋषियों की पूजा का पर्व ऋषि पंचमी धार्मिक नगरी नर्मदापुरम में भक्ति भाव से मनाया गया। महिलाओं ने स्नान कर विधि विधान से ऋषियों की पूजा अर्चना की। राजा मोहल्ले में भी ऋषि पंचमी पर पूजन का कार्यक्रम रखा गया जिसमें महिलाओं ने उपस्थित होकर पूजा अर्चना कर कथा सुनी। विदित रहे कि ऋषि पंचमी उन महान ऋषियों को याद करने का दिन है जिनके उपदेश और वेद मंत्र आज भी लोगों को सही जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। इस दिन महिलाएं विशेष रूप से व्रत रखती हैं। माना जाता है कि यह व्रत पवित्रता और आत्मशुद्धि का प्रतीक है।
नर्मदा की जलधारा में हुए स्नान
व्रतधारी महिलाएं शहर के सेठानी घाट, कोरीघाट, विवेकानंद घाट ,मंगलवारा घाटाें पर स्नान के लिए पहुंची। सबसे अधिक भीड़ सेठानी घाट पर रही। स्नान के बाद महिलाओं ने व्रत संबंधित सामग्री की खरीददारी की। इस पूरे सप्ताह में महिलाओं के व्रतों की संख्या सबसे अधिक है। अब दो दिन बाद संतान सप्तमी का व्रत आने वाला है।
लगातार व्रत कर रही अनेक महिलाएं
तिथियों के हेरफेर के कारण अनेक श्रद्धालु महिलाओं को लगातार व्रत करना पड़ रहा है। पहला व्रत तीजा का फिर अनेक महिलाएं सोमवार का व्रत रखती हैं कई महिलाएं गणेश चतुर्थी का व्रत रखती हैं इसके बाद यह ऋषि पंचमी का व्रत भी आ जाने से अनेक महिलाओं का लगातार तीसरे दिन भी व्रत रहा। पं राजेंद्र पांडेय ने बताया कि यह व्रत महिलाओं की आत्मशुद्धि का व्रत है। जिन महिलाओं से रजस्वला के दौरान कुछ देाष लग जाता है उसकी निवृत्ति के लिए सप्तऋषियों से क्षमा याचना की जाती है। उनकी पूजन से महिलाएं दोष मुक्त हो जातीं हैं।







