मनोकामना पूर्ति के लिए देश भर से आते हैं गणेश मंदिर में श्रद्धालु
तिल तिल बढ़ती है गणेश जी की प्रतिमा, आपदाओं से बचाते हैं गणेशजी
बलराम शर्मा,
पिपरिया। बनखेडी। (नर्मदापुरम) नर्मदांचल में देवी देवताओं के अनेक प्रसिद्ध स्थान हैं। उनमें बनखेडी तहसील के ग्राम वाचावानी में स्थित भगवान गणेश के प्राचीनतम गणेशधाम मंदिर में गणेश उत्सव के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमडती है। आदिदेव महादेव के व माता गौरी के पुत्र गणेश की मनोहारी एवं दुर्लभ अद्भुत प्राचीनतम प्रतिमा पिपरिया से करीब 18 किलोमीटर दूर बनखेड़ी मार्ग पर बसे ग्राम बाचावानी के गणेश मंदिर में विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा काफी प्रसिद्ध है। ग्रामवासियों के अनुसार यह स्थान लगभग 800 वर्ष प्राचीन है। इस प्राचीन प्रतिमा की विशेषता बताई जाती है कि इसमें एक दन्त गणेश जी की सूंड़ दाहिनी ओर है। एक ही सिला पर बनाई गई गणेश प्रतिमा के साथ ही ऋद्धि, सिद्धि, मूषक एवं शुभ लाभ भी उकेरे हुए हैं। यहां कई श्रद्धालुओं ने आकर दर्शन किए उनकी मनोकामना पूरी होती है जिससे यहां पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। पारंपरिक रूप से गणेश चतुर्थी से यहां विशेष पूजा अर्चना होती है। जो अनंत चतुर्दशी तक जारी रहती है।
मूर्ति और मंदिर की संक्षिप्त जानकारी
बनखेड़ी क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी व धार्मिक क्षेत्रों से विशेष रूप से जुड़े रामेश्वर पटेल व मंदिर के पुजारी अनंत दास बैरागी के अनुसार दाहिनी ओर सूंड़ की प्रतिमाएं बहुत बिरली हैंं। ऐसी प्रतिमा चारों धामों में शायद ही कहीं हो। प्राय: बायीं ओर सूंड़ वाली प्रतिमाएं ही मिलती हैं। वर्षों से एक ही परिवार के वंशज गणेश जी के पुजारी हैं। इस क्षेत्र के नागरिकों का कहना हैं कि यहां पर जो पुजारी हैं वे आठवीं पीढ़ी के हैं। उनके बुजुर्गों से सुना है कि करीब आठ सौ साल पहले ग्राम बाचावानी फतेहपुर रियासत का हिस्सा था जहां गौंड़ राजा का का राज्य था। उस समय यह मूर्ति यहां खेत में मिली होना बताया जाता है। राजा फतेहपुर को यह मूर्ति पसंद आ गई। उन्होंने इसे हाथी पर रखकर फतेह्पुर ले जाने की कोशिश की। लेकिन मूर्ति को लेजाने के लिए बिठाया गया हाथी गणेश जी की मूर्ति को लेकर खड़ा भी नहीं हो सका था। अंत में हारकर यह माना गया कि श्री गणेश जी स्वयं इसी स्थान पर ही रहना चाहते हैं। तब यहीं मंदिर बना दिया गया पहले मढिया थी उसके बाद मंदिर बन गया।
लगता है मेला
प्रसिद्ध स्थान होने से यहां पर 12 महिने श्रद्धालुओं का आगमन होता है। लेकिन तिल गणेश के पर्व पर यहां विशेष मेला लगता है। ऐसा कहा जाता है कि यहां श्रद्धाभाव से पूजा अर्चना करने से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। यहां तक कहा जाता है कि पुत्र प्राप्ति के इच्छुक दंपतियों की मनोकामना श्री गणेश पूरी करते हैं। अनेक श्रद्धालुओं ने स्वीकार भी किया है कि उनकी पुत्र प्राप्ति की कामना इस स्थान पर आने पर पूरी हुई है। श्रद्धाभान श्रद्धालुओं के द्वारा प्रदान की गई धन राशि से यहां के मंदिर का जीर्णोद्धार कराते हुए मंदिर को भव्यता प्रदान की गई है।
अनेक किवदंती प्रसिद्ध हैं
बताया जाता है कि यहां के गणेश जी तिल तिल बढ़ते जा रहे हैं। वहीं यह बात भी बताई जाती है कि गांव वालों पर श्री गणेश जी की बड़ी कृपा है प्राकृतिक आपदाओं से गणेश जी सुरक्षा प्रदान करते हैं। बाचावानी के खेतों में ओलों से कभी नुकसान नहीं हुआ। यहां ओले गिरते नहीं हैं। और यदि कभी गिरना शुरू हुआ तो मंदिर का घंटा बजाते ही बंद हो जाते हैं। जिससे नुकसान नहीं होता है।







