01 अप्रैल से अब तक जिले में 50 हजार 555 एमटी यूरिया का हुआ वितरण
गत वर्ष की तुलना से 7 हजार 310 एमटी अधिक,
वर्तमान में भी जिले में सतत की जा रही खाद की आपूर्ति
नर्मदापुरम/ जिले में खरीफ सीजन 2025 के लिए यूरिया, डीएपी, टीएसपी, एनपीके एवं एसएसपी सहित सभी अनुशंसित उर्वरकों की उपलब्धता निरंतर सुनिश्चित की जा रही है। वर्तमान में जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और कृषकों को उनकी आवश्यकता अनुसार वितरण किया जा रहा है।
01 अप्रैल 2025 से अब तक जिले में 55,983 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया, जिसमें से 50,555 मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है, जबकि 5,428 मीट्रिक टन यूरिया शेष उपलब्ध है। इसी अवधि में 23,364 मीट्रिक टन डीएपी एवं टीएसपी उपलब्ध कराए गए, जिनमें से 19,250 मीट्रिक टन का वितरण किया गया और 4,903 मीट्रिक टन शेष है। इसी प्रकार अब तक एनपीके 18156 एमटी में से 8346 का वितरण हो चुका है एवं 9810 एमटी उर्वरक शेष है।
जिले में विभिन्न सहकारी समितियों तथा निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद का वितरण किया जा रहा है। विगत वर्ष की तुलना में इस वर्ष खरीफ सीजन में यूरिया, एनपीके और एसएसपी की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष आज दिनांक तक 43,245 मीट्रिक टन यूरिया वितरित किया गया था, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा 50,555 मीट्रिक टन है, जो 7,310 मीट्रिक टन अधिक है। इसी प्रकार, एनपीके उर्वरकों का गत वर्ष वितरण 8,215 मीट्रिक टन से बढ़कर इस वर्ष 8,346 मीट्रिक टन हो चुका है है जो कि 131 मीट्रिक टन अधिक है, और एसएसपी का वितरण 16,848 मीट्रिक टन से बढ़कर 18,623 मीट्रिक टन (1,775 मीट्रिक टन अधिक) हुआ है। उवर्रकों एवं खाद का वितरण निरंतर
किया जा रहा है
आगामी दिनों में भी जिले को आवश्यकतानुसार रैक द्वारा उर्वरक की आपूर्ति होती रहेगी। कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना द्वारा समितियों में पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनके अनुसार भंडारण एवं वितरण हो रहा है।
जिले में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, अतः किसान भाई अपनी फसल की आवश्यकता अनुसार संतुलित मात्रा में ही उर्वरकों का उपयोग करें। उर्वरक प्राप्त करने हेतु अपनी ऋण पुस्तिका एवं आधार कार्ड साथ लाएं तथा पीओएस मशीन के माध्यम से ही उर्वरक प्राप्त करें। यदि किसी विक्रेता द्वारा शासकीय निर्धारित दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचा जाता है, तो तत्काल संबंधित विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को सूचित करें, ताकि आवश्यक कार्यवाही की जा सके।






