नाम का ही रह जाता है संभाग, मुख्यालय को शासन स्तर से दिए जाने चाहिए अधिकार

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परीक्षा एजेंसियां आनलाइन परीक्षा में बेरोजगारों को कर रही परेशान, हो रहा आर्थिक शोषण

संभाग मुख्यालय के युवाओं को परीक्षा देने जाना पड़ता है दूर के दूसरे शहरों में

नर्मदापुरम। शासन स्तर पर बेरोजगारों को बहुत परेशान किया जाता है। एक तो उन्हें रोजगार देने में चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की कोई भी सरकार सार्थक कदम उठाने में अक्षम सिद्ध हो रहीं हैं। दूसरी बात बेरोजगारों की परीक्षा लेने में भी सरकार के पास कोई ठोस प्रक्रिया नहीं है। जिससे बेरोजगारों में सरकार के प्रति बेहद नाराजगी है।

कहने को तो नर्मदापुरम संभाग है। लेकिन यहां पर संभाग स्तर के अधिकार बहुत ही कम ही हैं। संभाग में कई जेडी के पद रिक्त बने हुए हैं। यहां के उच्च शिक्षा प्राप्त बेरोजगारों को परीक्षा देने के लिए दूसरे संभाग या जिले में आन लाइन परीक्षा देने के लिए जाना पड़ता है। प्रतियोगी परीक्षाएं कराने वाले ठेकेदार व उनकी एजेंसियां संभाग मुख्यालय के बेराेजगार युवाअों को कभी भोपाल, कभी इंदौर, या जबलपुर या ग्वालियर या इससे भी दूर बुलाकर परीक्षाएं लेती हैं। आनलाइन परीक्षा होे या फिजीकल टेस्ट के लिए भोपाल या अन्य शहरों में बुलाया जाता है। ऐसी स्थिति में नर्मदापुरम काहे का संभाग यह तो जिला स्तर का भी नहीं है। यहां से बेरोजगारों को दूसरे जिले में बुलाया जाता है जिससे युवा बेरोजगार मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं। उनका व उनके परिवार का आर्थिक शोषण सरकार के द्वारा हो रहा है। नर्मदापुरम संभाग मुख्यालय पर परीक्षाएं नहीं कराई जाती है। इसे लेकर युवा बेरोजगारों में आक्रोश व्याप्त है। इसी कारण बीते चुनावों में अधिकांश बेरोजगारों ने मतदान का बहिस्कार कर ऐसी सरकारों व शासन की आलोलचना की थी। अभी भी बेरोजगारों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

कई कालेज हैं संभाग मुख्यालय पर

संभाग में दो दर्जन शासकीय व दो दर्जन निजी कॉलेज हैं पर उनमें प्राचार्यों के साथ कंप्यूटर की बेहद कमी बनी हुई है। पिछली सरकार ने वाह वाही लेने के लिए सिर्फ नाम के कालेज खोल दिए हैं। शासन आॅनलाइन परीक्षा दूसरे जिले की निजी कालेजों में कराता है। इससे प्रतिभागी बेरोजगारों में जमकर नारागजी बनी हुई है। बेरोजगारों को ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा देने के लिए बड़े शहरों में जाना पड़ रहा है। जिसमें काफी खर्च होता है। समय भी नष्ट होता है आने जाने में कई तरह की की परेशानी होती है। बेरोजगार युवाओं का कहना है कि डिजीटल युग में शासन या तो ऑनलाइन परीक्षा की जगह ऑफ लाइन परीक्षा कराए या फिर जिला मुख्यालय पर कम्प्यूटर की व्यवस्था कराई जाए जिससे कि बेरोजगारों को राहत मिल सके। परीक्षा एजेंसियों को हर जिला मुख्यालय पर कंप्यूटर उपलब्ध कराने की जबावदारी सौंपी जाना चाहिए। न कि युवाओं को परेशान किया जाए। फीस लेते समय शासन फीस भरवा लेता है। परीक्षाएं दूसरे जिले में कराई जाती है। यह गलत है।

पीएससी की परीक्षाओं की तरह हो परीक्षाएं

शिक्षित बेरोजागारों का कहना है कि जिस प्रकार पीएससी की परीक्षाएं आफ लाइन हो सकती है वह बड़ी परीक्षा है तो जब तक मुख्यालय पर पर्याप्त कम्प्युटर की व्यवस्थाएं नही हो जाती तब तक अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं भी आफ लाइन कराई जाएं। जिससे बेरोजगारों का समय और अनावश्यक आर्थिक नुकसान नहीं हो सके।

बेराजगार युवाओं को होती है परेशानी

आवेदक अरूण अग्रवाल का कहना है कि परीक्षा आयोजकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि प्रतियाेगी परीक्षा के लिए सभी जगह इतने कंप्यूटर नहीं है तब परीक्षा को पहले की तरह प्रश्न पत्र के माध्यम से जिला मुख्यालय पर कराई जाना चाहिए। पहले भी तो परीक्षाएं होती रही हैं। उसी तरह होनी चाहिए या फिर इतने कम्प्यूटरों की व्यवस्था जिले में कराई जाए।

. नाम का ही हैं संभाग

शिक्षित बेरोजगार एके शर्मा का कहना है कि संभाग होने के बाद भी यहां से बेरोजगारों को परीक्षा देने के लिए भोपाल इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर के सेंटर मिल रहे हैं। मुझे ही इंदौर का भोपाल जबलपुर सेंटर दिया गया था। ट्रेनों में बिना रिजर्वेशन के यात्रा नहीं हो पाती है। इस कारण पहले रिजर्वेशन कराना पड़ता है। उसके बाद संबंधित परीक्षा केंद्रों को खोजन जल्दी जाना पड़ता है। नर्मदापुरम संभाग नाम का ही संभाग है।

शासन को फीस लेना ही आता है

भोजराज का कहना है कि शासन भर्ती संबंधी परीक्षा के लिए फीस पूरी ले रहा है सुविधा अधूरी दी जा रही है। फिर आवेदकों को अपने पर छोड़ दिया जाता है। परीक्षा सेंटर कहीं का भी दे दिया जाता है। भोपाल में ही कई ऐसे कॉलेज को सेंटर बना दिया जाता है जो काफी दूर होते हैं। वहां पर आने जाने में बस या आटो में ज्यादा किराया लगता है।

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