कुबेरेश्वरधाम कंकर-कंकर में हैं शंकर, हर रोज आ रहे हजारों की संख्या में श्रद्धालु

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सीहोर। कंकर-कंकर शंकर का अर्थ है कि कुबेरेश्वर धाम में हर कंकर को भगवान शिव का रूप मानकर पूजा जाता है, और यह इस धाम की एक अनूठी विशेषता है। सोमवार को भी करीब 20 हजार से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं ने धाम पर पहुंचकर भजन-कीर्तन और ध्यान के साथ बाबा का अभिषेक किया। इन दिनों बड़ी संख्या में महाराष्ट्र के श्रद्धालु आ रहे है। जिससे शहर के सीवन घाट से करीब 11 किलोमीटर भक्तिभाव से धाम पर पहुंच रहे है और अभिषेक का क्रम जारी है।
जानकारी के अनुसार सोमवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, शाम को बाबा की आरती की गई। वहीं सुबह यहां पर अनेक श्रद्धालु कांवड लेकर पहुंचे, कांवड़ का महत्व सदियों पूर्व का है। कांवड़ यात्रा सिर्फ यात्रा नहीं भक्तों के असीम धैर्य, प्रेम व लगन का संगम है। जहां-जहां कांवड़िए दिखाई देते हैं ऐसा लगता है भक्ति वहां स्वयं प्रकट हो गई।
धाम पर हर तरफ भक्ति, यात्रा, पूजन, कीर्तन
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि 12 ज्योर्तिलिंग के मध्य में प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम करोड़ों श्रद्धालुओं का केन्द्र है। यहां पर अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में आने वाले श्रद्धालुओं ने  निशुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था की जाती है। यहां पर आने वाले हजारों की संख्या में श्रद्धालु धाम पर कंकर-कंकर में शंकर की पूजा अर्चना करते है। भगवान शिव वैसे तो हमेशा ही अपने भोलेपन में खुश होकर भक्तों को वरदान देते रहे हैं भक्तों की भावनाओं को, उनके द्वारा किये अभिषेक को वे सहर्ष स्वीकार करते हैं। ऐसी भक्तों की आस्था है, वैदिक धर्म को मानने वाले ईश्वर के जन्मोत्सव, विवाह आदि को भी अपनी रुचि के अनुसार मनाकर उस ईश्वर के सामीप्य को महसूस कर स्वयं को आनन्दित करते हैं। भक्ति, यात्रा, पूजन, कीर्तन आदि उनके दैनिक जीवन के अंग हैं।

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