कलेक्टर के नहीं आने पर कर्मचारियों के संगठनों ने बैठक का किया बहिस्कार
कर्मचारियों के साथ परामर्शदात्री समिति की बैठक करने से क्यों बचते हैं वरिष्ठ अधिकारी?
नर्मदापुरम। जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में गुरूवार को परामर्श दात्री की बैठक होना था। बैठक नियत समय से आधे घंटे देरी से और कलेक्टर की अनुपलब्धता में हो रही थी। इसलिए सभी कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने निवेदन किया की बैठक को निरस्त कर दिया जाए। और अगली डेट मे रखा जाए। कर्मचारियों के संगठनों के पदाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार पिछली तीन बैठकों में कलेक्टर उपस्थित नहीं रही। पिछली तीन बैठकों में दिए गये एजेंडे में कोई काम भी नहीं हुए बार बार समस्या बताने पर भी सालभर में निराकरण नहीं हुआ। बार बार संघ प्रतिनिधियों की मांग के बाबजूद भी अधिकांश विभाग में बैठकें नहीं हो रही हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि कलेक्टर के पास कर्मचारियों के संगठनों के साथ बैठक करने का समय नहीं है। जिससे संघ प्रतिनिधि व कर्मचारीयों में निराशा का भाव है। सभी चाहते थे कि कलेक्टर की उपस्थिति में बैठक हो। लेकिन कलेक्टर बैठक में उपस्थित ही नहीं हो रही हैं। इसलिए बैठक स्थगित करने और कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक रखने का आग्रह किया गया। जिस पर बैठक स्थगित की गई। सांथ ही ये भी आग्रह किया गया कि जो पूर्व में मुद्दे रखें गये है उन्हें हल कराकर आगामी बैठक के पहले कार्यवाही विवरण भी संघों को प्रदान किया जाये। इस बैठक में कर्मचारी संठगनों के राजेश चौरे, अरविंद तिवारी, अभिमन्यु राजपूत, दिनेश हाडा, गजेन्द्र जाटव, शैलेन्द्र तोमर, पूरूषोत्तम राजपूत, रवि दुबे, अंजू नारोलिया, शिवम पांडे, अमित परसाई, केवल राम संतोरे, अमित जायसवाल आदि उपस्थित रहे। प्रश्न उठता है कि कर्मचारियों के साथ परामर्शदात्री समिति की बैठक करने से क्यों बचते हैं वरिष्ठ अधिकारी?







