पचमढ़ी। पिपरिया। हिल स्टेशन पचमढी में नागद्वारी मेला का मुख्य आयोजन का दिन आज ही है। महाराष्ट्र प्रांत से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते ही जा रहे हैं। यहां पर नागपंचमी के अवसर पर शाम तक नागद्वार स्वामी के दर्शनों का सिलसिला जारी रहेगा। इसके बाद श्रद्धालुओं की वापसी शुरू हो जाएगी। मेला के अवसर पर पचमढ़ी में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। इन श्रद्धालुओं की सेवा के लिए विभिन्न स्थानों से सेवा मंडल आए हुए हैं। जो भक्तों को नि:शुल्क भंडारे का आयोजन करते हैं। यह मंदिर सावन मास में हर साल नागपंचमी से 10 दिन पहले शुरू होता है। नागपंचमी के दूसरे दिन मेला बंद हो जाएगा है। महाराष्ट्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां आ चुके हैं। लगभग 3 लाख से अधिक भक्त पहाड़ी गुफा में नागराज नागद्वार स्वामी के दर्शन कर चुके हैं। बताया गया कि पिछले दिनों वाहनों की संख्या 4 हजार प्रतिदिन तक पहुंच गई थी। जो सावन का सोमवार होने से अब पांच हजार तक हो गई है। इनमें सभी प्रकार के चार पहिया वाहन शामिल हैं। नागद्वारी मंदिर के अलावा पचमढ़ी के जटाशंकर, बड़ा महादेव और चौरागढ़ मंदिरों में भी भारी भीड़ हो रही है। यहां भी भक्तों की कतारें लगी हैं। पूरी पचमढी महादेव की है। इस कारण जगह जगह श्रावण माह में पचमढ़ी में जत्थे के जत्थे के पहुंच रहे हैं।
12 किलोमीटर की है नागद्वारी यात्रा
मिनी अमरनाथ की तरह माना जाता है
नागपंचमी के अवसर पर आयोजित होने वाले मेला में मुख्य रूप से नागद्वार मंदिर की यात्रा है। नागद्वारी मंदिर की 12 किलोमीटर की कठिन दुर्गम पहाड़ी यात्रा के कारण इसे मिनी अमरनाथ यात्रा की तरह माना जाता है। इसी कारण नागद्वारी को छोटा अमरनाथ भी कहा जाता है। हर साल सावन मास में यह मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इसके बाद जंगल का इलाका होने के कारण इसे बंद कर दिया जाता है। धूपगढ़ क्षेत्र में पहाड़ी गुफा के अंदर नागराज विराजमान हैं। उनके दर्शन सावन मास में नाग पंचमी के दौरान करना शुभ माना जाता है। मेले से स्थानीय व्यापारियों और बाहरी व्यापारियों को अच्छा खासा रोजगार मिल जाता है। हजारों लोग इस मेले में खरीददारी करते हैं। मेला अवधि में पचमढ़ी के छावनी क्षेत्र में 250 से लेकर 300 दुकानें लगी हैं। जिनमें खूब बिक्री हो रही है।







