महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन की तर्ज पर नर्मदापुरम में भी स्थित है नागचंद्रेश्वर मंदिर

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रात को 12 बजे खुलते हैं नागचंद्रेश्वर मंदिर के द्वार, आज होगी नागदेवता की विशेष पूजन

तीसरी मंजिल पर विराजे हैं नागदेवता, पूरे दिन पूजन अर्चन और दर्शन का क्रम रहेगा जारी

रश्मि गौड़, शर्मा

नर्मदापुरम। श्रावण का पूरा माह विशेष पर्व के रूप में माना जाता है। नागपंचमी का पर्व आज भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। शहर के तीन प्रमुख स्थानों पर बने नागदेवता मंदिरों में दिन भर श्रद्धालुओं के द्वारा पूजन अर्चन और दर्शन का क्रम जारी रहेगा। इसी के साथ घर घर में नागदेवता की पूजन की जाएगी। कोठी बाजार में नर्मदा तट स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर की तीसरी मंजिल के ऊपर बने नागदेवता के मंदिर के दरवाजे रात 12 बजे 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। उज्जैन के महाकालेश्वर महादेव मंदिर की तर्ज पर साल भर में सिर्फ एक ही दिन दरबाजे खोले जाते हैं। इसी के साथ नागपंचमी पर कई लोग परंपरागत रूप से अपने घरों में नारियल की नरेली जलाकर उसकी राख में दूध मिला कर उससे दीवार पर नाग की आकृति उकेर कर विधिविधान से पूजन करेंगे। परंपरा के तहत कई लोगों के घरों में चूल्हे पर तवा नहीं रखा जाता। दाल बाटी बनाई जाती है। सोहागपुर में चौरसिया समाज के द्वारा नागपंचमी को चौरसिया दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर नागदेवता की विशेष पूजन अर्चन की जाती है।

नागपंचमी पर विशेष पूजन अर्चन

मंदिरों के शहर नर्मदापुरम में नागपंचमी का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। यहां पर तीन स्थानों पर नागदेवता के मंदिर हैं। जिनमें एक सेठानी घाट पर प्राचीन नाग मंदिर है। उसी नाग मंदिर के पास स्थित काले महादेव मंदिर की तीसरी मंजिल पर भी नागदेवता विराजमान हैं। यहां पर भी सुबह से ही नागदेवता की पूजन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। जो दिन भर जारी रहेगा। इसी तरह कोठी बाजार में 12 वर्ष पूर्व स्व. पं प्रकाश चंद्र चौरे ने नागचंद्र्रेश्वर मंदिर की स्थापना नर्मदेश्वर महादेव मंदिर की तीसरी मंजिल की गुबंद पर की विधिविधान से कराई है तभी से यहां पर लोगों का तांता लगता है। यहां पर उन्होने 12 नागनागिन के जोडे़ के साथ ही शिव पार्वती जी की प्रतिमा की स्थापना कराई है। जो अन्य स्थानों वर वैसी नहीं है। इस मंदिर के दरवाजे भी उज्जैन की ही तरह वर्ष में एक बार नागपंचमी के दिन ही 24 घंटे के लिए खुलते हैं। यहां पर सभी श्रद्धालुओं के लिए नागदेवता की पूजन अर्चन करने के लिए पूरे दिन द्वार खुले रहते हैं। पूजन अर्चन करने वालों का सुबह से लेकर रात तक तांता लगा रहता है। रात के बारह बजे फिर 365 दिन के लिए द्वार बंद हो जाते हैं।

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