दीवार और फर्स होने लगे गीले, सीलन से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा विपरीत असर
जिले में स्कूलों की अनुमानित संख्या-
+हायर सेकंडरी स्कूल-92
+हाई स्कूल-88
+मिडिल स्कूल-549
+प्राइमरी स्कूल-1141
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नर्मदापुरम, रश्मि गौड़ शर्मा। बीते एक माह से लगातार बारिश जारी है। मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचल के स्कूलों में वर्षा का पानी रिसकर अंदर कक्षों में टपक रहा है। जिससे स्कूलों की दीवार तथा फर्श गीले हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को कक्षाओं में बिठाने पर उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने की संभावना बन रही है। शिक्षा विभाग और प्रशासन द्वारा इन जर्जर स्कूलों पर बीते वर्ष पोलीथीन डाल कर व्यवस्था करनी पड़ी थी। इस बार शिक्षा सत्र शुरू होने पर बच्चे कहां बैठेंगे इस पर चिंतन नहीं किया गया। छत से रिसकर पानी अंदर टपकने लगा है।
वर्षा ने खोल दी है व्यवस्थाओं की पोल
क्षेत्र में लगातार हो रही वर्षा ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। वैसे तो अधिकांश स्कूल भवनों का बुरा हाल है। वर्षा से स्कूल भवनों के फर्श से लेकर दीवार तक गीली हो रही हैं। स्कूलों में सीलन होने लगी है। स्कूलों के क्लास रूम, स्टाफ रूम और लाइब्रेरी तक में पानी गिरने लगा है। ऐसी स्थिति में बच्चों को यहां वहां बैठाकर शिक्षक पढ़ाई की औपचारिकता करा रहे हैं। कुछ स्कूलों की हालत तो इतनी दयनीय है कि अंदर बैठने तक की सही जगह नहीं बची है। इसलिए बरामदे में बिठाया जा रहा है।
1870 हैं सरकारी स्कूल
जिले में प्रायमरी, माध्यमिक, हाई स्कूल आैर हायर सेकेंडरी स्कूल मिलाकर 1869 हैं। कुछ सीएम राईज स्कूल और बढे हैंं इनमें से एक भी स्कूल ऐसा नहीं बचा है कि जिसमें सीलन की स्थिति ना हो। अधिकांश स्कूलों के छत से पानी टपकने के साथ ही दीवार भी गीली हो चुकी हैं। तमाम स्कूलों में तो वर्षा का पानी अंदर तक चले जाने के कारण फर्श भी गीले हैं। जिससे स्कूली बच्चों को कक्षों में बैठने की समस्या खड़ी हो रही है।
100 वर्ष पुराना हो चुका है उत्कृष्ट स्कूल
जिले के 100 वर्ष से अधिक प्राचीन उत्कृष्ट स्कूल जिसे पहले गवर्मेंट स्कूल कहा जाता था। अब इसे उत्कृष्ट स्कूल कहा जाता है। इस स्कूल का निर्माण अंग्रेजों के शासन काल में हुआ है। भवन जीर्णशीर्ण हो चुका है मरम्मत की दम पर टिका हुआ है लेकिन अनेक कक्षों में वर्षा का पानी टपकता है। प्राचार्य साधना बिल्थरिया ने स्कूल में काफी कुछ कार्य कराया है। बीते वर्ष अधिक वर्षा होने से स्कूल की हालत अौर खराब हुई है।
एसएनजी स्कूल
शहर के मध्य में स्थित प्राचीन शाससकीय एसएनजी स्कूल भी लगातार वर्षा के कारण अंदर बाहर और ऊपर से क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसकी भी मरम्मत बार -बार कराए जाने के कारण यहां पर कक्षा में टेबिल कुर्सी लगा कर बैठना हो पाता है। नीचे फर्श की हालत ठीक नहीं है। इस स्कूल के भी 24 कक्षों में से करीब 14 कक्षों में सीलन व दीवारें गीली हो चुकी हैं। पुराने कक्षों को तोडा जा रहा है। उनके स्थान पर नए बनेंगे लेकिन अभी तो बारिश ने स्थिति बिगाड दी है।
कन्या शालाओं की हालत
शहर में दो कन्या शालाएं हैं जिनमें प्राचीन कन्या उच्चतर माध्यिक शाला सबसे पुरानी शाला है यहां के अाधे से अधिक भवन क्षतिग्रस्त हैं। जिनकी खिड़की दरवाजे से पानी अंदर पहुंचता है। जिससे दीवार के साथ ही फर्श भी गीला हो जाता है। ऐसा ही हाल शहर की जुमेराती कन्या शाला का भी है यहां पर भी बारिश के पानी से स्कूल की दीवारें तथा फर्श गीले हो रहे हैं।
कुछ निजी स्कूलों में भी शीलन
वर्षा के कारण शहर के 200 स्कूलों में से आधे स्कूलों की दीवारों में भी सीलन है। इनमें से करीब 25 प्रतिशत स्कूलों में वर्षा का पानी छत से टपपकने तथा खिड़की दरबाजे के पास से रिसकर अंदर तक जाने से स्कूलों के फर्श गीले हो जाते हैं। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने की संभावना बन रही है।







