अधिकारी शिकायत को निराधार बताकर सीएम हेल्पलाइन को करवा रहे है फोर्स क्लोज
नर्मदापुरम। शा गृहविज्ञान महाविद्यालय के संगीत विभाग से 2022 में सेवानिर्वित्त तबला शिक्षक आरएस शर्मा को महाविद्यालय ने प्रथम समयमान दे दिया है किन्तु द्वितीय एवं तृतीय समयमान वेतनमान की टालमटोली की जा रही है। उन्होंने बताया कि सीएम हेल्प लाइन में ग्यारह बार शिकायत दर्ज कराई किन्तु सम्बन्धित शिकायत को निराधार बताते हुए गलत टिप्पणी देकर शिकायत को फोर्स क्लोज करवा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अधिकारी ना शिकायत को गंभीरता से ले रहे है और ना ही शिकायतकर्ता से बात करते हैं जबकि शिकायतकर्ता की संतुष्ठी के बिना शिकायत क्लोज करना नियम विरुद्ध है। सीएम हेल्प लाइन के नियमों एवं उद्देश्यों का पालन भी नही किया जा रहा है। सीएम हेल्प लाइन को गुमराह कर रहे है। कलेक्टर जनसुनवाई में भी शिकायत को निराधार बताकर बंद करा दी गई। सम्बन्धित अधिकारी समस्या को जानते हुए निराधार बता रहे है और शासन के नियमों एवं आदेशों का परिपालन न करते हुए अनदेखा कर रहे हैं। उनका कहना है कि वित्त विभाग के चार्ट में छपे गलत वेतनमान को मुद्दा बनाया जा रहा है जिसे संशोधित करबाना उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दायित्व है जो कि 2008 में जारी हुआ था जिसे उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी अभी तक संशोधित नहीं करा पाये हैं। ये लापरवाही है। मैरे द्वारा समयमान वेतनमान के चार्ट मे गलत छपे वेतनमान को सुधार कराने हेतु विगत 10 बर्षो में अधिकारियों को लिखित में सेकड़ों आवेदन दिये जा चुके है किन्तु उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी संशोधित नहीं करा पा रहे हैं। जिससे मुझे पेंशन में नुकशान हो रहा है।
श्री शर्मा ने यह भी बताया कि वे अनेकों बार प्राचार्य अतिरिक्त संचालक एवं आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग भोपाल से समयमान वेतनमान देने हेतु निवेदन कर चुका हूं। जिस पर आयुक्त उच्च शिक्षा ने द्वितीय एवं तृतीय समयमान देने हेतु प्राचार्य को लिखित आदेश भेजा है। किन्तु उस आदेश का परिपालन भी नहीं किया जा रहा है। मप्र शासन के 1982 के राजपत्र में छपा वेतनमान बिल्कुल सही है जिसे अनदेखा किया जा रहा है तथा मप्र शासन उच्च शिक्षा के आदेश क्र 1605 दि 1,12,1989 में दर्ज तबला संगत्कार के सही वेतनमान को भी सम्बन्धित अधिकारी अमान्य करते हुए बर्ष 2008 के समयमान वेतनमान चार्ट मे छपे गलत् वेतनमान को प्राथमिकता दे रहे है जो कि नियुक्ति वेतनमान से तीन स्टेज निचला है । मप्र शासन वित्त विभाग के आदेशो में वर्तमान मौजूद वेतनमान के तहत कार्यालय प्रमुख को प्रथम द्वितीय एवं तृतीय समयमान वेतनमान देने के निर्देश हैं तथा वित्त विभाग के ही आदेश क्र एफ11 ध्नियम चार दिनांक 24-1-2008
के विन्दु क्रमांक 12 में स्पस्ट उल्लेख है कि प्रथम क्रमोन्नति मिलने के बाद बिना किसी गोपनीय प्रतिवेदन की जांच के समस्त समयमान वेतनमान देने हेतु कार्यालय प्रमुख अधिक्रत हैं। महाविद्यालय के कार्यालय प्रमुख प्राचार्य लेखपाल एवं उच्च शिक्षा विभाग के सम्बन्धित अधिकारी कर्मचारी शासन के आदेशों पर ध्यान नही देते हुए आदेशों के निर्देशों का पालन नही कर रहे है जिससे कार्यवाही लंंबित है ।
उन्होेंने बताया कि हमे जो भी वेतनमान मिले हैं सभी शासन के आदेशों के तहत मिले हैं जो कोष लेखा से सत्यापित भी हो चुके हैं। उन्हे गलत मानना अधिकारियों की अज्ञानता एवं लापरवाही है। तबला शिक्षक संगत्कार का नियुक्ति वेतनमान न्यायायालय के आदेशानुसार शासन के निर्देशों से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संशोधित कर वेतनमान 5000-8000 स्वीकृत किया गया है तथा क्रर्मोन्नत वेतनमान 5500-9000 दिया गया है । अतः नियमानुसार उक्त वेतनमानों के आधार पर प्रथम द्वितीय एवं तृतीय समयमान देना चाहिए किन्तु नहीं दिया जा रहा है। आदेशों को अनदेखा कर चार्ट में छपे गलत वेतनमान को मुद्दा बनाया जा रहा है जबकि उसे संशोधित करवाना चाहिए। या मौजूदा वेतनमानों के तहत सभी समयमान देना चाहिए । शासकीय महाविद्यालयों के समस्त तबला शिक्षक संगतकारों का कहना है कि वित्त विभाग एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी इस समस्या पर चर्चा एवं आवश्यक कार्यवाही कर समस्या का निराकरण कर सकते है किन्तु अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है तथा न्यायालय जाने हेतु मजबूर किया जा रहा है।








