नए कल कारखाने, उद्याेग धंधे तथा रोजगार, स्वरोजगार की आस लगाए हुए हैं नौजवान
बलराम शर्मा,
नर्मदापुरम। नर्मदापुरम संभाग को बढ़े नेताओं के रूप में सौगात मिलती जा रही है। यदि पूरे संसदीय व संभागीय स्तर पर नजर डाली जाए तो एक केंद्रीय मंत्री, दो प्रदेश के केबिनेट मंत्री एक दर्जन के करीब विधायक तीन सांसद व अब प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष मिले हैं। इतने अधिक नेताओं वाले क्षेत्र में अब नाली, सड़क, पुल पुलिया से कुछ ऊपर उठते हुए नए कल कारखाने, उद्योग धंधे तथा रोजगार स्वरोजगार के वास्तविक कार्यों की शुरूआत की उम्मीद संभाग व संसदीय क्षेत्र के नव युवा बहुत आशाभरी नजरों से आस लगाए हुए हैं। उनकी उम्मीद पर ये नेता खरे उतरेंगे या नहीं यह तो समय बताएगा।
जिस प्रकार पूर्व में बढ़े नेताओं ने एसपीएम, आर्डीनेंस फेक्टरी, खेती किसानी के उपयोग के लिए तवा बांध तथा समीप में स्थित बुदनी में जो दो बड़ी कंपनियों ने टेक्सटाइल कंपनी शुरू हुई हैं। कुछ इसी प्रकार से अब क्षेत्र में कुछ बढ़े कार्यों की शुरूआत बढ़े नेताओं द्वारा बहुत आवश्यक है। तभी तो बढ़े नेताओं का लाभ क्षेत्र के नागरिकों को मिल सकेगा। जैसा कि बुदनी में शिवराज सिंह चौहान ने बढ़े नेता होने का फर्ज निभाते हुए बुदनी जैसे तहसील स्तर के शहर में संभाग स्तर की सुविधा मेडिकल कालेज खुलवाने में अहम भूमिका निभाई है।
कई उद्योग धंधे शुरू हो जाने थे
डोलरिया के स्टील प्लांट का बुरा हाल हुआ क्योंकि सोतले नेताओं ने कुछ नहीं कर पाए। अपना और अपने परिजन का भला कर लिया। बाबई कृषि फार्म होने का लाभ भी क्षेत्र के किसानों नागरिकों बेरोजगारों का नहीं मिल सका।
दो अरब रूपयों से बने पंवारखेड़ा के लाजिस्टिक हब में एशिया महाद्वीप की श्रेष्ठ कृषि भूमि पर सिर्फ सीमेंट कांक्र्रीट के गाेदामों की दीवाल बना दी जिसमें कुछ मात्रा में धान और और गेहूं ही रखा जा रहा है और लोहे की पटरी ही डल कर रह गई।
पर्यटन की बातें बहुत और काम कम
नर्मदांचल में प्रकृति ने पर्यटन के हिसाब से संपदा खूब बिखेरी है। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पचमढ़ी, मढ़ई, चूरना, तिलक सिंदूर के साथ ही मां नर्मदा के पावन तट व अन्य अनेक धार्मिक स्थल आकर्षित करते हैं। लेकिन उन्हें उस तरह से विकसित नहीं किया जा सका जितना होना था। नेता और अफसर डींगे बहुत हांकते हैं लेकिन धरातल पर वैसा स्वरूप नहीं बन सका है जैसा होना था।







