नर्मदापुरम। समाज में साहत्यि का बड़ा महत्व है। साहित्य का महत्व पहले भी था अब भी है। भटकाव होने पर साहत्यिकार ही सही दिशा दिखाते है। यह बात पूर्व विधान सभा अध्यक्ष विधायक डॉ सीता सरन शर्मा ने राधा कृष्ण गार्डन में वरिष्ठ गीतकार प्रदीप दुबे दीप के दोहा संग्रह ‘आ जाया कर गांव’ के विमोचन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि नर्मदांचल साहित्यकारों की भूमि है। यहां अनेक साहित्यकार हुए वर्तमान में भी हैं।
इस अवसर पर चातुर्मास के लिए आए वीतराग शिरोमणि स्वामी निर्मल चैतन्य पुरी जी महाराज ने कहा कि राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी ने साहित्य की अलख जगाई थी। वह परंपरा नर्मदांचल में अभी भी जारी है। श्री दुबे जी के दोहा संग्रह में अनेक तरह की सीख है। महाराज जी ने संस्कृत में अनेक श्लोकों के माध्यम से साहित्य के योगदान का उल्लेख किया।
विशेष अतिथि पूर्व पाठ्य पुस्त्क निगम के अध्यक्ष माधव सिंह दांगी ने खेतों में होने वाली बोवनी व कटाई के समय गाए जाने वाले गीत, तथा ग्रामीण परिवेश के अनेक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए आ जाया कर गांव से संबंधित अनेक दोहों का सुमधुर गायन करते हुए सभी को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने दोहा संग्रह की शानदार समीक्षा की।
अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत आईएएस अधिकारी, साहित्यकार ओपी श्रीवास्तव ने कहा कि श्री दुबे के दोहा संग्रह को मैंने बहुत तन्मयता से पढ़ा है। सभी दोहे बहुत अच्छे हैं। उसमें उल्लेखित गांव की संस्कृति और संस्कार की झलक देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में ग्रामीण परिवेश का बहुत अच्छा चित्रण है बहुत अच्छी शब्दावली है, भावनात्मक जुड़ाव भी है। उन्होंने कहा कि पढ़ते समय चार बार आंसु आए। इस दोहा संग्रह में प्रकृति, पर्यावरण और अमत्व का भाव है।
समाजसेवी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पं भवानी श्ंकर शर्मा और पूर्व विधायक गिरजा शंकर शर्मा ने पुस्तकें ज्ञान का स्त्रोत होती हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में रेलवे स्टेशन पर अनेक साहित्यिक पुस्तकें मिल जाती थी। लेकिन अब अच्छी पुस्तकें नहीं मिल पाती हैं। अब नई पीढ़ी का झुकाव मोबाइल की ओर बढ़ा है। इस अवसर पर श्री दुबे ने अपने दोहा संग्रह से कुछ दोहे की रोचक प्रस्तुत दी। सभी अतिथियों, सामजसेवियों व मौजूद साहित्कारों संगीतकारों ने श्री दुबे को उनकी कृति के प्रकाशन व विमोचन पर शुभकामनाएं दी। नर्मदापुरम कला जगत परिवार की ओर से श्री दुबे का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया।
इस मौके पर पुस्तक की बारे में डॉ कृष्ण गोपाल मिश्र द्वारा लिखित विचारों का पाठन श्रीमती स्वर्णलता छेनिया ने किया। संचालन डॉ मनीषा तिवारी ने आभार प्रदर्शन राकेश दुबे ने किया।
समारेाह में डॉ संतोष व्यास, डॉ गोपाल कृष्ण मिश्र, संगीतकार नमन तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता एसएस ठाकुर, अरूण शर्मा, शास्त्री नित्यगोपाल कटारे, पं गिरिमोहन गुरू, खेमचंद यादवेश, राकेश फौजदार, बाबूलाल कदम, कमलेश सक्सेना, डॉ हंसा व्यास, श्रीराम परसाई, पत्रकार बलराम शर्मा, शंशाक मिश्रा, मिलिंद रोंघे, सुभाष यादव, डॉ विजय महंत, रामभरोष महाते, पार्षद नरेंद्र पटेल, डाॅ हरिओम दीक्षित, पूर्व पार्षद श्रीप्रकाश शर्मा, आरती शर्मा, अंजली मिश्रा, अमित गुप्ता, अारआर सोनी, मुकेश श्रीवास्तव, सहित श्री दुबे के परिजन प्रियजन शामिल रहे।







