भगवान विष्णु रहेंगे योगनिंद्रा में लीन, महादेव संभालेंगे सृष्टि का प्रभार

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चातुर्मास हुआ प्रारंभ अब साधु, संत, महंत एक स्थान पर रहकर करेंगे आरधना

नर्मदापुरम। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से चातुर्मास शुरू हो गया है। परंपरानुसार भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन हो गए हैं। जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु के शयन में जाने के साथ ही मांगलिक कार्य चार माह तक थम गए है। वैवाहिीक कार्य पूरी तरह बंद हो जाएंगे। चार माह तक वैवाहिक सहित अन्य मांगलिक कार्य ग्रह प्रवेश सहित अन्य कार्य बंद रहेंगे। सिर्फ पूजन-पाठ,भजन-कीर्तन और अभिषेक के आयोजन होंगे। देव के सोने के बाद अब पूरी सृष्टि का प्रभार भगवान महादेव के पास ही रहेगा। प्राचीन परम्परा के तहत श्रीहरि आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी से शयन काल में योग निंद्रा में रहेंगे। भगवान विष्णु अब तुलसी विवाह के समय पर ही जागेंगे। तब तक साधु-संत-महंत और सन्यासी द्वारा चार माह तक चतुर्मास की साधना जारी रहेगी। आचार्य.पं नीरजेशत्रिपाठीभगवान विष्णु रहेंगे योगनिंद्रा में लीन, महादेव संभालेंगे सृष्टि का प्रभार संभालेंगे।

चातुर्मास हुआ प्रारंभ अब साधु, संत, महंत एक स्थान पर रहकर करेंगे आरधना

अब चार माह तक चतुर्मास की साधना जारी रहेगी। पं प्रवीण मिश्रा ने बताया कि एकादशी से चातुर्मास शुरू हो गया है। उन्होने बताया कि शास्त्रों में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है। एकादशी को पदमा व देवशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। चतुर्मास की अवधि में मांगलिक कार्य नहीं होंगे। यह अवधि प्रभु वंदना का विशेष पर्व माना जाता है।

भवगवान को कराया विश्राम

अनेक समाजों में देव शयनी एकादशी के अवसर पर अपने ईष्ट को योग निंद्रा में विश्राम कराए जाने की परंपरा है। अनेक ब्राम्हण समुदाय में भी यह परंपरा रहती है। विधिविधान से भगवान काे शयन कराय जाता है। पूजन अर्चन व सामूहिक कुटुंबियों के साथ देवशनी एकादशी मनाई जाती है।

नर्मदा तट पर किया जाता चातुर्मास

नर्मदा परिक्रमावासी सहित अन्य संत समाज के भक्त जन चातुर्मास में एक ही स्थान पर रहते हुए पूजन अर्चन व आराधना में लीन रहते हैं। नर्मदा तट के जगदीश मंदिर, तिलक भवन, विंध्याचल शेड, सत्संग भवन, विवेकानंद घाट सहित अन्य अनेक धार्मक स्थानों व धर्मशालाओं में अनेक साधु संत चातुर्मास करते हैं।

गार्डनों, में,रहेगा, साधु सतों का डेरा

पूर्व में नर्मदा तट पर चातुर्मास में संतों का डेरा लगता था। अब कुछ समय बाद इस बार भी शहर के अनेक स्थानों पर साधु संतों का आगमन हो रहा है अनेक गार्डनों में सासु संतों के द्वारा चातुर्मास रखा जा रहा है गार्डनाें में कथा प्रवचनों का आयोजन होगा।

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