सीहोर/ जिले के किसानों द्वारा बोई जाने वाली प्रमुख फसल सोयाबीन है, उर्वरकों के बढ़ते मूल्यों को दृष्टिगत रखते हुये फसलों की अधिक पैदावार के लिए यह आवश्यक है कि रासायनिक उर्वरकों का संतुलित और सही मात्रा में उपयोग किया जाए। उप संचालक कृषि श्री केके पांडे ने बताया कि जिले में सभी स्रोतों को मिलाकर सोयाबीन का 23,577 क्विंटल बीज उपलब्ध है। इसके साथ ही जिले में 22,816 मेट्रिक टन यूरिया, 5137 मीट्रिक टन डीएपी, 12,673 मेट्रिक टन एसएसपी तथा 3,831 मेट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। उप संचालक कृषि श्री पांडे ने बताया कि वर्तमान में यूरिया और डीएपी का प्रचलन बहुत बढ़ गया है जो केवल नाइट्रोजन एवं फास्फोरस के अलावा अन्य पौषक तत्वों को प्रदान नहीं करते है। इन उर्वरकों के लगातार प्रयोग से मिट्टी में पोटाश एवं सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी संभावित है। पोटाश का फसल के स्वास्थ्य एवं गुणवत्ता से सीधा संबंध है, इसके उपयोग के फलस्वरूप पौधा सुदृढ़ होकर रोग बीमारियों से कम प्रभावित होता है तथा दानों की चमक में भी वृद्धि होती है, जिस कारण अच्छा बाजार भाव प्राप्त होता है। कॉम्पलेक्स उर्वरकों में नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश तत्व पाये जाते है। इसी प्रकार एसएसपी में फास्फोरस के साथ-साथ सल्फर एवं कैल्शियम तत्व भी पाया जाता है। किसानों से अपील की गई है कि डीएपी एवं यूरिया का आवश्यकतानुसार ही समिति या निजी व्यापारी से प्राप्त कर उपयोग करें। इसके साथ ही साथ ही डीएपी के अन्य विकल्प भी उपलब्ध हैं। किसान इनका भी उपयोग कर सकते हैं। किसानों के लिए ये उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं जैसे एनपीके(12:32:16) 591 मेट्रिेक टन, एनपीके(16:16:16) 566 मेट्रिक टन, एनपीके(24:24:0) 43.75 मेट्रिक टन, एनपीके(20:20:0) 160 मेट्रिक टन, एनपीके एस(20:20:0:13) 3430 मेट्रिक टन उपलब्ध है। किसानों के लिए इन उर्वरकों का उपयोग बहुत फायदेमंद साबित होगा।








