अधिकारियों ने सोच लिया है तबादला तो होना ही है जितने दिन टिक सको टिके रहो
वर्षों से जमें डाक्टरों और प्रोफेसरों को भी दिखाया जाए बाहर का रास्ता
नर्मदापुरम। मुख्यालय पर अनेक अधिकारियों का समय कुछ ज्यादा ही हो चुका है। वैसे नियम तो यह होना ही चाहिए कि किसी भी कार्यालय में कोई भी कर्मचारी जिन्हें अधिकारी कहते हैं वे सही मायने में हैं तो शासकीय कर्मचारी ही उन्हें तो दो वर्ष से अधिक समय नहीं रहने दिया जाना चाहिए। जब कलेक्टर एसपी को दो तीन वर्ष में हटा दिया जाता है। तो फिर कालेज के प्रोफेसरों से शासन क्यों डरता है। एक बार हिम्मत करके कालेज के सभी ऐसे प्रोफेसरों और डाक्टरों को बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए जिनके तीन वर्ष हो चुके हों। अब दूसरी जगह देंखे। उन्हें वेतन दिया जाता है कोई मुफ्त में कार्य तो लिया नहीं जा रहा है। फिर उनकी मनमानी क्यों चलती है।
तथाकथित अधिकारियों को तीन वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे बेमियादी हो चुके अधिकारियों को अब नर्मदापुरम से कहीं भी दूरस्थ जिले में कर दिया जाना चाहिए। क्योंकि एक ही स्थान पर वे भी बोर होने लगे हैं साथ ही नागरिक भी वही वही चेहरा देखकर बोर होने लगे हैं।
सीधा सच्चा जिला देखकर टिके रहो
अधिकारियों ने भी सोच लिया है तबादला तो होना ही है जितने दिन टिक सको टिके रहो। जाना तो है।
कार्यालयों में मीटिंग ईटिंग के साथ चीटिंग कर चुके इन मुसाफिरों को अब और ज्यादा दिन नहीं रखा जाना चाहिए। शासन में बैठे जबावदार लोग ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। इस कारण ये बेमियादी मुसाफिर अपना टाइम पास कर रहे हैं।
करीब दो दर्जन का जाना तय है
जिला मुख्यालय से करीब दो दर्जन ऐसे मुसाफिर जिन्हें दो तीन वर्ष से अधिक समय हो गया है अब उनका जाना तय हो चुका है। सोमवार से सूची आने की उम्मीद जग रही है। मुख्यमंत्री के आगमन पर भी अनेक लोगों ने चुपचाप उन्हें आवेदन देकर मुसाफिरों को हटाए जाने की मांग की है।








