भोपाल (आरएनएस)। राज्यसभा सांसद एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर राज्य में मजदूरों के कल्याण के लिए बनाए गए कोष में से अन्य मद में डायवर्ट की गई राशि रू. 416.33 करोड़ का बजट में प्रावधान करने और उसे पुन: मजदूर कल्याण कोष में लिया जाने का अनुरोध किया है।
इस पत्र में दिग्विजय सिंह ने बताया है कि मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण मंडल के पास मार्च 2022 तक रू. 1,959.63 करोड़ की अप्रयुक्त राशि थी। लेकिन वित्त वर्ष 2021-22 में, बोर्ड ने रू. 1,128.57 करोड़ खर्च किए, जिसमें से रू. 416.33 करोड़ की राशि निर्माण श्रमिकों के लिए किसी भी कल्याणकारी योजना में नहीं लगाई गई बल्कि उसे तत्कालीन शिवराज सिंह की सरकार के निर्देशन में अक्टूबर 2021 में दो विद्युत सब्सिडी योजनाओं – मुख्यमंत्री बकाया बिजली बिल माफी योजना और सरल बिजली बिल योजना, पर खर्च कर दिए गए।
दिग्विजय सिंह ने बताया है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है। कोर्ट के उन आदेशों में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों द्वारा मजदूर कल्याण फंड को अन्य योजनाओं में खर्च करने की प्रवृत्ति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे शक्ति से प्रतिबंधित किया था।
दिग्विजय सिंह ने कहा है कि यह एक गंभीर मुद्दा है और इसका समाधान निकालना आवश्यक है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय ने भी जून 2016 में सभी राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए थे कि रूक्क क्चह्रष्टङ्ख अधिनियम की धारा 22(1) (द्ध) के तहत मजदूरों और उनके परिवारों के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए फंड का उपयोग नहीं किया जा सकता फिर क्या कारण है कि मध्य प्रदेश में कानून के विरुद्ध जाकर इस फंड का दुरुपयोग किया गया?
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से अनुरोध किया है कि प्रदेश के मजदूरों के कल्याण के लिए कानूनी रूप से बनाए गए कोष में से अन्य मद में डाइवर्ट की गई राशि रुपए 416.33 करोड़ का बजट में प्रावधान करके उसे पुन: रूक्क क्चह्रष्टङ्ख बोर्ड के खाते में लिया जाए तथा उक्त राशि को नियम विरुद्ध डाइवर्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हेतु समुचित निर्देश देने का कष्ट करें। उन्होंने मुख्यमंत्री से उम्मीद जताई है कि वे इसे गंभीरता से लेंगे तथा कैग की रिपोर्ट पर कार्यवाही करते हुए कानून तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय की भावनाओं के अनुरूप कार्रवाई करेंगे तथा इस प्रकार की फंड डायवर्जन को भविष्य में रोकने के लिए ठोस कदम भी उठाएंगे।








