पहले जहां समस्या केवल स्कूल फीस तक सीमित थी, वहीं अब यूनिफॉर्म, जूते, बैग, कॉपियां और किताबें भी निर्धारित दुकानों से खरीदने का दबाव
भोपाल (विशेष संवाददाता)। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की फीस, ड्रेस, किताबों और अन्य शैक्षणिक सामग्री की बढ़ती लागत ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। अनेक अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर उन पर लगातार अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है।
अभिभावकों के अनुसार पहले जहां समस्या केवल स्कूल फीस तक सीमित थी, वहीं अब यूनिफॉर्म, जूते, बैग, कॉपियां और किताबें भी निर्धारित दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जाता है। कई मामलों में कम पृष्ठों वाली पुस्तकों की कीमत भी अपेक्षाकृत अधिक बताई जा रही है, जिससे अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा है। इस विषय पर शहर के कुछ पुस्तक विक्रेताओं से बातचीत में यह बात सामने आई कि अधिकांश कॉपियों और स्टेशनरी सामग्री पर तो ग्राहकों को कुछ छूट दी जा सकती है, लेकिन कई स्कूलों द्वारा निर्धारित पुस्तकों पर छूट देना संभव नहीं होता। उनका कहना है कि स्कूलों द्वारा तय नियमों और आपूर्ति व्यवस्था के कारण उन्हें पुस्तकों का विक्रय निर्धारित मूल्य पर ही करना पड़ता है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि स्कूलों में पुस्तक चयन, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री की खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो तो अभिभावकों को राहत मिल सकती है। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान प्रदान करना है, न कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बढ़ाना। वहीं अभिभावकों का यह भी कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बनी धारणा के कारण वे निजी स्कूलों का विकल्प चुनने के लिए मजबूर हैं। इसी मजबूरी का लाभ उठाकर कुछ संस्थान मनमाने नियम लागू कर रहे हैं, जिससे आम परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने शासन एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस, पुस्तक सूची, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री की खरीद व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाए तथा अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। शिक्षा सेवा है, व्यवसाय नहीं। यदि शिक्षा से जुड़े खर्चों पर संतुलन नहीं बनाया गया तो इसका सबसे बड़ा प्रभाव आम और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा।








