गुरुकुल अध्यक्ष की अध्यक्षता में छोड़ी आहुतियां, गूंजे वेदों के स्वर
नर्मदापुरम। नर्मदा तट पर स्थित प्राचीन गुरुकुल का 114 वां स्थापना दिवस वैदिक यज्ञ हवन व गुरुकुल के अध्यक्ष स्वामी ऋतस्पति परिब्राजक और प्रधानाचार्य सत्यसिंधु आर्य ने आशीर्वचन दिया। सुबह के समय यज्ञशाला में हवन से स्थापना दिवस का शुभारंभ हुआ। शाम के समय गुरुकुल में ब्रम्हचारियों ने 114 दीपक लगाकर खुशियां मनाई गई। दोपहर में आचार्यों ने वेद के प्रचार प्रसार पर जोर दिया। ब्रम्हचारियों को गुरुकुल पद्धति से वैदिक शिक्षा का ज्ञान कराने वाली प्रदेश की वैदिक ज्ञानार्जन कराने वाली अग्रणी संस्था गुरुकुल ने अपने 113 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 27 अप्रैल को गुरुकुल का 114 वां स्थापना दिवस सादगी के साथ मनाया गया। 100 सदस्यीय गुरुकुल परिवार द्वारा उमंग और उत्साह के साथ स्थापना दिवस मनाया गया। यहां पर प्रतिदिन हवन व योग व्यायाम होेतें हैं। गुरुकुल में ब्रम्हचारियों को वेद के साथ ही विज्ञान,गणित और कंप्यूटर की शिक्षा दी जाती है।
114 दीपकों से जगजगमाया गुरुकुल
स्थापना वर्ष के अवसर पर गुरुकुल परिवार के आचार्य व ब्रम्हचारियों सहित गुरुकुल परिवार के सदस्यों ने गुरुकुल की यज्ञशाला सहित अन्य स्थानों पर 114 दीपमालिका जलाकर गुरुकुल को जगमगा दिया। इस अवसर पर स्वस्ति वाचन के साथ ही वेद मंत्रोंच्चार किया गया।






