ज्योतिबा फुले जयंती पर हुआ आयोजन

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 ज्योतिबा फुले नहीं होते तो आज का भारत नहीं होता-कमलेश दोहरे
सीहोर। शिक्षा के अग्रदूत महामना ज्योतिबा फुले जयंती के मोके पर बाबा साहेब अंबेडकर धर्मशाला मैं कार्यक्रम का आयोजन किया गया कार्यक्रम में शिक्षा के अग्रदूत कहे जाने वाले ज्योतिबा फुले जी के संघर्ष को याद करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि के रूप में कमलेश दोहरे पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राष्ट्रीय बौद्ध महासभा द्वारा महात्मा फुले जी के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह गरीब माली परिवार से होने के बावजूद भी उन्हें समाज की से  अशिक्षा को दूर करने के लिए 52 स्कूल खोले और अपनी पत्नी को भी पढ़ाया लिखाया और उन्हें भारत की पहली महिला शिक्षिका के रूप में स्थापित किया ,फुले दंपत्ति अगर नहीं होते तो हम वर्तमान भारत जो देख रहे हैं शायद इसकी कल्पना करना भी हमारे लिए मुश्किल होता उन्होंने कहा था कि शिक्षा बिना माति गई, माति बिना गति गई, गति बिना धन संपत्ति गई, और धन संपत्ति के बिना शूद्रों का विनाश हुआ , उन्होंने विधवा पुनर्विवाह , बाल विवाह पर रोक, और समाज में फेले अंधविश्वास को दूर करने के लिए जीवन भर कार्य किया, उनके द्वारा एक प्रसिद्ध किताब गुलामगिरी की रचना की गई जिनको समाज के हर व्यक्ति को पढऩा चाहिए ,कार्यक्रम में उपस्थित समाज के नेता नरेंद्र खंगराले जी ने भी अपने विचार व्यक्त किया इस मौके पर प्रमुख रूप से हरिओम बौद्ध धनराज सिंह थरेले, नीरज जाटव, कृष्णा सूर्यवंशी ,गेंदालाल सूर्यवंशी,शुभम कचनारिया, महेश सूर्यवंशी, लाड़ सिंह बौद्ध नवीन महोबिया, कपिल चौधरी, विक्की महोबिया आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे, कार्यक्रम का आभार बहुजन उत्सव समिति के अध्यक्ष धनराज सिंह थरेले द्वारा किया गया।

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