सीहोर। आधुनिक युग में किसान अधिक उत्पादन हेतु फसल की बोनी में विभिन्न कम्पनियों के रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं। जिसके प्रयोग से मृदा विषैली तथा रसायनिक हो चुकी है। शिवशक्ति बायो ग्रुप द्वारा गाँव-गाँव जाकर किसान संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत ग्राम पिपलानी में एक किसान संगोष्ठी का आयोजन में कृषि अधिकारी वीरसिंह मालवीय ने बताया कि अगर रासायन पद्धति खेती की गई तो आगामी वर्षों में किसान अपनी जमीन को बंजर कर लेगा। उन्होने किसान भाईयों को बताया कि किसान परम्परागत खेती से भटक कर रसायनिक खाद एवं उर्वरक की ओर चले गये है, जिसका दुष्परिणाम भी किसानों को देखने को मिल रहा है। उन्होने कहा कि जैविक खेती में ही किसान भाईयों का भविष्य सुरक्षित है तथा कम कीमत में जीवाणु भूमि की संरचना को सुधारते है। जैविक खाद एवं दवाईयों के प्रयोग से भूमि की उर्रर शक्ति बढती है और जीवाणुओं की संख्या बढती है जो कि भूमि के लिये अति आवश्यक है।
आज के बढते रासायनिक खाद एवं कीट नाशकों के प्रयोग से भूमि की स्थिति खराब होती जा रही है। जमीन में कार्बन की न्यूनतम मात्रा 0.9 प्रतिशत व 6.5-7.5 पीएच मान की आवश्यक होती है। मिट्टी के 31 हजार सैंपलों में से 29 हजार में कार्बन की मात्रा 0.6 – 0.7 प्रशित व 7 एचपी मान से अधिक है। रासायनिक खादों का प्रयोग करके फसलों पर तो दुष्प्रभाव पड़ ही रहा है। साथ-साथ मानव जीवन के लिये बहुत हानिकारक साबित हो रहा है। रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के प्रयोग से भूमि के उपर एक कठोर परत जम गई है जिससे उसकी उपजाऊ क्षमता में कमी आ रही है इस अभियान में निरंतर कार्य कर रहे अधिकारी जी किसानों को अवगत करा रहे है कि किसान बंधु कम लागत में अधिक पैदावार करके आर्थिक स्थिति तो सुधार ही सकते है। इसके लिए जीवाणु का खेती मे महत्व बताकर भूमि की उपजाऊ क्षमता को बढा कर अपनी अपनी मातृ भूमि की रक्षा कर के पर्यावरण प्रदूषण से बचा पायेगें। संगोष्ठी में उपस्थित सभी किसान भाईयों ने जैविक खेती करने का संकल्प लेते हुए प्रतिवर्ष एक से दो एकड़ रकबा जैविक खेती का प्रतिवर्ष बढाने का वचन दिया है।








