होलिकाष्ठक के चलते मांगलिक कार्य में रहेगी रूकावट
रश्मि गौड़
नर्मदापुरम। डोलरिया विविध रंगों का त्योहार होलिका उत्सव आने वाला है। आठ दिन शेष हैं। शुक्रवार से होलिकाष्टक शुरू हो रहे हैं। शहर में करीब 200 स्थानों पर होली के डांडे गाड़े जाते है। इन होली के डांडे काे होलिकाष्ट के प्रथम दिन से ही सजाया जाकर पूर्णिमा की रात में होलिका का पूजन करने के बाद देर रात में दहन किया जाएगा। दूसरे दिन धुलेंडी मनाई जाएगी।
इस वर्ष होलाष्टक 7 मार्च से शुरू होकर 13 मार्च तक रहेंगे। फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक 8 दिनों तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं। हालांकि देवी.-देवताओं की पूजा-अर्चना के लिए ये दिन बहुत श्रेष्ठ माने गए हैं। ज्योतिषाचार्य राजेंद्र पांडेय के अनुसार होलाष्टक शब्द होली और अष्टक से मिलकर बना है। इसका मतलब है होली के आठ दिन। होलाष्टक के दिनों में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, मकान, वाहन की खरीदारी आदि मांगलिक कार्यों की रूकावट रहती है।
होली के त्योहार को लेकर हुरियारों के द्वारा विशेष तैयारी की जाती है। होली दहन वाले स्थानों होलिका दहन के लिए लकड़ी के साथ ही गोबर के कंडे एकत्रित करने का कार्य किया जाएगा। लोगों में जागरूकता आती जा रही है। अधिकांश स्थानों पर कंडे की होली जलाई जाने लगी है। युवाओं के साथ बच्चों की टोली होली की तैयारी में जुटेगी। जिसमें ग्वालटोली में पहले से ही कंडे की होली जलाने की प्राचीन परंपरा का निर्वाह किया जाएगा। इसी के साथ ही सतरस्ते पर, सेठानी घाट पर महाआरती स्थल, मालाखेड़ी के यादव माेहल्ला तथा आदमगढ़ में भी होली के अवसर पर रात में कंडे की ही होली जलाने की परंपरा निभाई जा रही है। वहीं जुमेराती, भीलपुरा सहित अन्य स्थानों पर होली के डांडे सजाए जाने आज से शुरू होंगे। शहर के अनेक स्थानों पर कंडे के साथ लकड़ी की भी होली जलाई जाती है जिनमें होली चौक के नाम से प्रसिद्ध मोहल्ले में भी दोनोें प्रकार की सामग्री मिलाकर होली जलाई जाती है। माेरछली चौक, के अलावा एकता चौक, कोरी घाट, कोठीबाजार और अन्य स्थानों पर होलिका दहन के कार्यक्रम परंपरागत रूप से किए जाएंगे। जिसकी तैयारी शुरू हो रही है।
मुख्य चौराहों और कालोनियों में मनने लगी होली
शहर के प्रमुख चौराहों सहित शहर से सटी हुई और कुछ दूरी पर स्थित नई-नई कालोनियों में होलिका दहन के आयोजन होते है। जिसमें कुछ लोग कंडे की कुछ लोग कंडे और लकड़ी दोनो मिलाकर होलिका दहन करते हैं। होलिकाष्टक लगने से पूर्व ही त्योहारी रौनक शुरू होने लगी है।






