साहित्य का रचना कर्म कभी भी श्रेय और प्रेय की प्राप्ति के लिए नहीं होता-दवे

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नर्मदापुरम। साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग भोपाल द्वारा प्रदेश के युवा रचनाकारों की दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय सृजनात्मक कार्यशाला कौशल्या कुटी में आयोजित हुई। अकादमी के निदेशक डा विकास दवे ने कहा की साहित्य की रचना करते समय हम अपनी राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गौरव बोध को कभी विस्मृत ना करें। साहित्य का रचना कर्म कभी भी श्रेय और प्रेय की प्राप्ति के लिए नहीं होता अपितु राष्ट्र देवता और समाज देवता की पूजा अर्चना में अर्पित किए हुए ताजा पुष्प की तरह होता है। यदि हमने अपने रचनाकर्म का उपयोग निजी हित के लिए किया तो यह एक प्रकार का प्रज्ञा अपराध होगा। हमें अपने साहित्य धर्म का निर्वाह करते हुए सदैव राष्ट्र के परम वैभव के स्वप्न को अपनी आंखों के सामने रखते हुए ही रचना कर्म संपन्न करना है। नई पीढ़ी के आप सब रचनाकार अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान और संस्कृति के प्रति गौरव की भावना को कभी भी नजर

अंदाज न होने दें यही आज के युग की प्रथम आवश्यकता है।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद मध्य भारत प्रांत के महामंत्री आशुतोष शर्मा ने जाति प्रथा कलंक है युवा विमर्श जिले में हों। सांस्कृतिक पर विचार व्यक्त किए विचारधार को बढ़ाने के लिए अध्ययन जरूरी है। फिल्मों में नास्तिकता को बढ़ावा देते हैं।

भारत के बढ़ते कदमों को रुकने नहीं देना है।

सनातन का सामर्थ्य है कि विश्व को शांति के मार्ग पर ले जा सकता है। पंच परिवर्तन की जीवन में उतारेंए सिर्फ भाषण तक सीमित नहीं रखें। घनश्याम मैथिल ने लघुकथा पर कहां की कथा अंत तक बांधी रहती हैंएलघुकथा में कथा तत्व होना अनिवार्य हैं इसमें एकबार में एक घटना का पूरा विवरण होना चाहिए। प्रत्येक विधा अपने आप में पूर्ण हैं एवं आवश्यक हैं लघुकथा फिलर नहीं बल्कि किलर का काम कर रही हैं। लघुकथा कम शब्दों में विशिष्ट एवं बड़ी बात हम कह सकते हैं। इस दौरान अखिल भारतीय साहित्य परिषद महाकौशल प्रांत के अध्यक्ष राजेंद्र सोनी ने साहित्य और संगठन विषय पर अपने विचारों से युवा कवियों को अवगत कराया। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये युवा कवि साहित्यकार उपस्थित रहे। संचालन आरती शर्मा ने व्दितीय सत्र का संचालन सौरव यादव एवं आभार केप्टिन करैया ने किया।

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