आजीविका स्वाद संगम फ़ूड किओस्क का शुभारंभ – महिला सशक्तिकरण की ओर एक और कदम

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नर्मदापुरम/स्वसहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जनपद पंचायत पिपरिया तहसील परिसर में” आजीविका स्वाद संगम फ़ूड कियॉस्‍क ” का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम में स्वसहायता समूह की दीदियों, गणमान्य अतिथियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आमजन की गरिमामयी उपस्थिति रही। आजीविका स्वाद संगम दीदी किओस्क का संचालन तेजस्विनी  संकुल स्तरीय संघ के स्वामित्व में स्व सहायता समूह की मेहनती एवं समर्पित महिलाएं करेंगी, जिन्हें मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना और स्वास्थ्यवर्धक एवं स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराना है। इस किओस्क में शुद्ध, ताज़ी एवं गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के व्यंजन तैयार किए जाएंगे। यहां परंपरागत देसी व्यंजनों के साथ-साथ साउथ इंडियन और चाइनीज़ डिश भी उचित दामों पर उपलब्ध होंगी। खास बात यह है कि किओस्क में उपयोग की जाने वाली अधिकांश खाद्य सामग्रियां भी स्व सहायता समूहों द्वारा ही निर्मित और आपूर्ति की जाएंगी, जिससे महिलाओं की आजीविका को और अधिक मज़बूती मिलेगी। श्री एस एस रावत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नर्मदापुरम द्वारा बताया गया कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रदेशभर में “फूड क्लस्टर” की स्थापना की जा रही है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन और रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। यह किओस्क इस दिशा में एक सशक्त पहल है, जो अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करेगी। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों ने इस पहल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इस शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीना नवनीत नागपाल ने कहा, “स्व सहायता समूह की महिलाएं जिस लगन और मेहनत से इस किओस्क का संचालन करेंगी, वह न केवल पिपरिया की पहचान बनेगा, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देगा।” आजीविका स्वाद संगम फ़ूड किओस्क सिर्फ एक भोजनालय नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह पहल गांव-गांव में महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता की ओर अग्रसर करने का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि समाज में उनकी भूमिका और भी सशक्त होगी।

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