सीहोर। भाजपा जिला कार्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर नगर मंडल के तत्वाधान में कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर आजीवन सहयोग निधि अभियान की शुरुआत की गई। इस मौके पर मुख्य अतिथि विधायक सुदेश राय, भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा और भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष सुदीप प्रजापति सहित अन्य भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं को स्व. उपाध्याय के जीवन, संघर्षों व उनके आदर्शों का जिक्र करते हुए कहा कि सुविधाओं में पलकर कोई भी सफलता पा सकता है पर अभाव के बीच रहकर शिखर को छूना बहुत कठिन है। भारतीय जनता पार्टी ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जो छोटे से छोटे कार्यकर्ताओ के आर्थिक सहयोग से चलती है। कार्यकर्ताओ द्वारा दिया गया समपर्ण कार्यकर्ताओ में अनुशासन लाता है जो पार्टी में निस्वार्थ रुप से कार्य करता है साथ ही भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष श्री प्रजापति ने बताया कि 23 फरवरी को मन की बात कार्यक्रम प्रत्येक बूथ पर सुना जाना है जिसको लेकर योजना बनाकर बूथ पर निवासरत सभी कार्यकर्ताओं को सूचना पहुंच जाए।
भाजपा नगर मंडल के अध्यक्ष श्री प्रजापति ने बताया कि मंगलवार को पंडित श्री उपाध्याय की पुण्यतिथि के मौके पर करीब 30 हजार के साथ निधि अभियान की शुरूआत की गई। उन्होंने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय समाज के एक महान विचारक, अर्थशास्त्री और राजनेता थे। उनका जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के नगला चंद्रभान नामक गांव में हुआ था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का प्रमुख योगदान भारतीय राजनीति और दर्शन में उनके सम्पूर्ण मानवतावाद के सिद्धांत के रूप में था, जिसे उन्होंने भारतीय समाज के विकास के लिए एक वैकल्पिक दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत किया। सम्पूर्ण मानवतावाद का सिद्धांत यह कहता था कि मनुष्य का सर्वांगीण विकास केवल भौतिक समृद्धि पर निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी मानसिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं को भी पूरा करना चाहिए। उनका मानना था कि पश्चिमी समाज की भौतिकवाद और उपभोक्तावाद की ओर झुकी हुई सोच से भारत का विकास नहीं हो सकता, क्योंकि भारत की सांस्कृतिक और पारंपरिक धारा बहुत भिन्न है। सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं को भी पूरा करना चाहिए। उनका मानना था कि पश्चिमी समाज की भौतिकवाद और उपभोक्तावाद की ओर झुकी हुई सोच से भारत का विकास नहीं हो सकता, क्योंकि भारत की सांस्कृतिक और पारंपरिक धारा बहुत भिन्न है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारधारा निर्माता थे। उन्होंने भारतीय समाज में जातिवाद, असमानता और गरीबी के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया और यह सुनिश्चित किया कि भारत का विकास आत्मनिर्भर और स्वदेशी सिद्धांतों पर आधारित हो। उनका निधन 11 फरवरी 1968 को हुआ, और उनकी मृत्यु आज भी रहस्यमयी मानी जाती है। बावजूद इसके, उनका योगदान भारतीय राजनीति और समाज में अनमोल बना हुआ है, और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।








