अदभुत अनोखा अलोकिक बना नजारा, जगमग हुए घाट और दीपकों से शोभायमान हुई मां नर्मदा की जलधारा

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मां नर्मदा के जन्मोत्सव पर नर्मदा नगरी के तमाम घाटों पर उमड़ा जनसमुदाय

-मां नर्मदा जन्म प्रकटोत्सव एक नजर में-

: 3 लाख श्रद्धालुओं ने 12 घाटों पर की मां नर्मदा जी पूजन अर्चन

: 900 पुलिस, होमगार्ड,एनसीसी जवानों नेे संभाली व्यवस्था की कमान

: 20 स्थानों पर हुआ करीब 50 क्विंटल हलुआ का वितरण आैर भंडारा

: 50 पंडितों ने घाटों पर नर्मदा जी और सत्यनरायण की पूजन अर्चन कराई

: 20 स्थानों पर प्रशासन ने यातायात व्यवस्था बनाने के लिए लगाए बेरीकेटस

: 50 हजार श्रद्धालुआें ने सेठानी घाट पर बैठकर किए पूजन अर्चन के दर्शन

: 100 लोगों के साथ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जलमंच से की आराधना

: 5 लाख रुपये की पूजन सामग्री, नालियल,चिरोंजी,और लंहगा चुनरी की बिक्री हुई

: 1000 हजार से अधिक रंगबिरंगे ध्वजों से मां नर्मदा तट के घाट सजाए गए

नर्मदापुरम। हर वर्ष की तरह ही मां नर्मदा का प्रकटोत्सव व नर्मदापुरम के गौरव दिवस के अवसर पर नर्मदा नगरी के हर घर में उत्सवी माहौल रहा। उमंग उल्लास और उत्साह के साथ राजराजेश्वरी मां नर्मदा का जन्मोत्सव मनाया गया। मां नर्मदा के तट के सभी प्रमुख घाट, चौराहे सतरस्ता, रंग बिरंगी रोशनी से नहाये हुए से लग रहे थे। वहीं अखंख्य दीपों की मणिमाला से जल धारा जगमग-जगम हो रही थी। दूर-दूर तक टिमटिमाते हुए मां की गोद में इठलाते हुए दीपक ऐसे लग रहे थे कि आसमान से तारे जमीं पर उतर आए हों। ऐसा अलौकिक दृश्य सबको आकर्षित करने के साथ ही मनभावन लग रहा था।

-दीपावली सा वातावरण-

मां नर्मदा का जन्मोत्सव पर दीपावली जैसा महोत्सव हो गया। शहरवासियों ने घरों में साफ-सफाई लिपाई पुताई कर तोरणद्वार साजाए। घर में हलुवा पूड़ी बनाकर परिवार के साथ निकल पड़े आैर पहुंच गए नर्मदा के घाट जहां पर श्रद्धाभक्ति के साथ प्रदेश की जीवनदायनी मां रेवा की पूजन में मगन हो गए। शहर के सभी प्रमुख 12 घाटों पर दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मां नर्मदा की पूजन कर लहंगा चुनरी चढ़ाई। कई नन्हें मुन्हें बच्चों के मुंडन संस्कार किए गए। इसके अलावा जगह-जगह भंडारे के आयोजन होते रहे।

दो लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे नर्मदा तट के घाटों पर

नर्मदापुरम का सबसे खास पर्व नर्मदा प्रक्टोत्सव बन चुका है। बीते एक सप्ताह से नर्मदा जन्मोत्सव की तैयारी हर घर में हो रही थी। मां के जन्म दिन पर कई श्रद्धालुओं ने सुबह डुबकी लगाई पूजन की। इसी के साथ शहर के तमाम क्षेत्रों में सामूहिक रूप से हलुवा बनाने का कार्यक्रम होता रहा है। घाटों पर सुबह से लेकर देर रात तक दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

-जगह-जगह हुए भंडारे के आयोजन-

शहर के वीरसावरकर घाट के पास स्वत्र प्रशांत दुबे पीपल चौक से ही भंडारे का आयोजन शुरू हो गया। उसके बाद विवेकानंद घाट,शिवाजी चौक, नेहरू पार्क के पास, सर्किट हाउस के पास,अस्तपाल के सामने, एकता चौक, मौरछली चौक, सतरस्ता, अमर चौक, जय स्तंभ, मंगलवारा घाट आदि स्थानों पर भंडारे के आयोजन होते रहे।

-लाखों दीपों का दीपदान-

मां नर्मदा के प्रकटोत्सव पर दीपदान करने की परंपरा के चलते हर घर से दीप लेकर श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे। हर घाटों से दीपकों का दीपदान शाम से ही शुरू हो गया था। कई श्रद्धालु नाव से तो कई श्रद्धालु किनारे से दीपक विसर्जित कर रहे थे। इस प्रकार लाखों दीपकों का दीपदान किया गया। शाम के समय नर्मदा जट पर अलौकिक नजारा दीपों से हो रहा था। नर्मदा जी की जलधारा जगमग हो गई थी।

-लगातार लगते रहे जयकारे-

सुबह से पूजन अर्चन और आरती का क्रम शुरू हो गया था जो रात तक जारी रहा। पूजन अर्चन के साथ हर हर नर्मदे कर के जयकारे से पूरा दिन गुंजायमान होता रहा। इस मौके पर अनेक धार्मिक आयोजन होते रहे। अनेक समाजसेवी नर्मदा में प्रदूषण नहीं करने का संदेश भी देते रहे।

-आतिशबाजी का मनमोहक नजारा-

नर्मदा तट पर दीपदान और रंगारंग आतिशबाजी का नजारा मनमोहक रहता है। नर्मदा तट के उस पार जोशीपुर व नाव पर आतिशबाजी की जाती है। जिसे हजारों लोग बड़े उत्साह से देखते हैं। कुछ देर तक आसमान की ओर जाती आतिशबाजी बहुत सुंदर लगती है।

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