शहरवासी इतने कभी परेशान नहीं हुए होंगे जितने सडकों को खराब करने से हो रहे हैं
नर्मदापुरम। सीवरेज योजना के नाम जिस बेरहमी से संडकें खोदी गई हैं। सड़कों को बहुत बुरी तरह से बदतर किया गया है। इससे पूरे शहर के नागरिक इतने परेशान हैं कि इससे पूर्व इतने अधिक परेशान शायद ही कभी रहे होंगे। इस तरह शहरवासियों को परेशान करने पर ठेकेदार पर भी एफआईआर होना चाहिए। सिर्फ एफआईआर ही नहीं कड़ी कार्रवाई तुरंत होनी चाहिए। इस योजना के चलते सड़कों की लगातार खुदाई की जा रही है। यह अभियान बीते दो वर्ष से जारी है। सुधार के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। जिससे अनेक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों के हाथ पैर टूट रहे हैं। लगागार वाहन खराब हो रहे हैं। लोगों के वाहन में अनावश्यक ईधन बर्वाद हो रहा है। लेकिन ठेकेदार के खाते में राशि पहुंच रही है।
बदतर हो चुकी सड़कों पर नागरिकों को वाहन चलाना मुश्किल हो रहा है। शहर में ऐसी कोई सड़क नहीं बची जो खराब नहीं हुई हो। वाहन चालकों के साथ ही पैदल चलने वाले लोग भी परेशान हैं। हालात यह है कि कलेक्ट्रेट के आसपास की सड़कें भी ठीक नहीं हैं। शहर के अांतरिक क्षेत्रों में ही लोगों को वाहनों से आने जाने में बहुत ज्यादा का समय लग रहा है। इसके अलावा दुर्घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं।
वाहन चलाना हो रहा मुश्किल
सड़कों पर गड्ढों की संख्या इतनी अधिक होती जा रही है कि कई क्षेत्रों में दो पहिया वाहन चलाने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदारों को जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है। शहर के आंतरिक मार्गों की हालत दयनीय हो गई है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढों के साथ पानी भरा होने व कीचड़ की समस्या से रहवासी और वाहन चालक त्रस्त हो चुके हैं। सड़क पर एक फीट गहरे व तीन फीट लंबे तक गड्ढे हो गए हैं। जिस पर पानी भर जाने के कारण दल दल हो रही हैं। उनमें वाहन पटकाने पर वाहन के क्षतिग्रस्त होने के साथ वाहन चालक को भी दुर्घटना का डर बना हुआ है।
करोड़ों रूपयों से बनी सड़कों काे ठेकेदार कर रहा क्षतिग्रस्त
तथाकथित जबावदार बने हुए हैं घृतराष्ट्र व गांधारी
बड़ी मुश्किल से नागरिकों को सड़क की सुविधा मिल पाती है। लेकिन बीते दो वर्ष से बनी बनाई सड़कों को अनचाही अमृत योजना के नाम पर खोदकर बर्वाद किया जा रहा है। बीच सड़क से पाइप लाइन बिछाने के नाम पर पहले सड़कों की खुदाई की जाती है। उसके बाद उसकी मिट्टी को एक पखवाड़े या महिनों के लिए सड़कों पर ही पड़ी रहने दी जाती है। जैसे शहर में कोई रहता ही नहीं हो। नर्मदा नगरी के सीधे सच्चे लोग अपनी सहनशक्ति का परिचय देते हुए चुपचाप खुदी हुई सड़कों से गड्ढों से अपने वाहन निकालते रहते हैं। तकलीफ भोगते रहते हैं। जब ठेकेदार की मर्जी होती है तब खुदी हुई सड़कों पर लीपापोती करते हुए सुधार के नाम पर मलहम पट्टी लगाकर छोड़ देता है। सड़कों के बीच में जो चेंबर के नाम पर कार्य होता है उसे भी आधा अधूरा छोड़ दिया जाता है। तथाकथित जनप्रतिनिधि ठेकेदार को कुछ कहने से डरते हैं। या उनकी मिली भगत से सब हो रहा है। शहर के लोग ही कहते हैं कि शहर के जबावदार घृतराष्ट्र और गांधारी बने हुए हैं।
तथाकथित अधिकारियों को क्या करना?
शहर की सड़कें टूंटे फूटे बर्वाद हो इससे तथाकथित अधिकारियों को क्या करना उनकी तो नौकरी हो ही रही है। वे तो मुसाफिर हैं उन्हें आज इस शहर में नौकरी करना है कल कहीं और लाखों रूपये हर महिने सरकार देगी ही। इसलिए उन्हें जो गिने चुने दिन महिने साल मिले हुए हैं उतने समय टाइम पास करते हुए समय गुजार रहे हैं। उनकी आंख पर भी पट्टी बंधी रहती है।
प्रभारी मंत्री को कराया जा चुका अवतग
नर्मदा जयंती और रामजी बाबा की बैठक लेने आए प्रभारी मंत्री राकेश सिंह को भी इस परेशानी से अवगत करा दिया है। उन्होंने कलेक्टर से भी जानकारी ली सोनिया मीना ने उनको सच्चाई से अवगत करा दिया।
बेेढंगे बन रहे चेंबर
अमृत योजना के तहत जो जगह जगह बेढंगे चेंबर बनाए गए हैं। उनका सही तरीके से कार्य पूरा नहीं हुआ है। अनेक स्थानों पर ऊबड खाबड पड़े हुए हैं जिससे आवागमन में परेशानी हो रही है। लेकिन जबावदार चुप हैं। नगरवासी कह रहे हैं कि बेतुके चेंबरों को कौन और कब सुधारेगा?






